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चीन में अब Bubonic Plague से मौत के आंकड़े बढ़े, प्रशासन ने हेल्थ अलर्ट जारी किया

Highlights कोरोना वायरस (Coronavirus) के बाद अब ब्यूबोनिक प्लेग फैलने को तैयार, चीन के शहर में हेल्थ अलर्ट जारी। बुबोनिक प्लेग को लेकर चीन, मंगोलिया (Mongolia) और रूस में सरकार सतर्क, घातक बीमारी से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है।

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bubbonic plague

इस प्लेग से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है।

बीजिंग। चीन (China) में कोरोना वायरस (Coronavirus) की उपत्ति के बाद अब नया खतरा आकार ले रहा है। बुबोनिक प्लेग ( Bubonic Plague) नाम का संक्रमण धीरे-धीरे फैल रहा है। उत्‍तरी चीन के बयन्नुर शहर में इस संक्रमण से लगातार मौत के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। इसे लेकर हेल्थ वॉर्निंग जारी की गई है। मंगोलिया से सटे बयन्‍नूर शहर में बुबोनिक प्लेग से शनिवार को एक व्यक्ति की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि इस घातक बीमारी से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है।

तीसरे स्तर की हेल्थ वॉर्निग जारी

चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार बयन्‍नूर शहर की स्वास्थ्य समिति ने एक व्यक्ति के इस खतरनाक बीमारी से मौत होने के बाद तीसरे स्तर की हेल्थ वॉर्निंग को जारी कर दी है। गौरतलब है कि बुबोनिक प्लेग को लेकर सरकार पहले से सतर्क है। ऐसे में हो रही मौतों को लेकर सरकार हर स्तर पर तैयारी कर रही है।

आखिर क्या है ये बुबोनिक प्लेग

बुबोनिक प्लेग को 'ब्लैक डेथ' या काली मौत के रूप में जाना जाता है। यह कोई नई बीमारी नहीं है। इसकी वजह से करोड़ों लोगों की पहले भी मौत हो चुकी है। दुनिया भर में ये बीमारी तीन बार कहर बनकर टूटी है। पहली बार इसकी चपेट में लगभग पांच करोड़ लोग आए थे। वहीं, दूसरी बार यूरोप की एक तिहाई आबादी और तीसरी बार करीब 80 हजार लोगों की मौत हो चुकी है।

कैसे होती है यह बीमारी?

यह बीमारी जंगली चूहों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया से होती है। दरअसल, सबसे पहले बुबोनिक प्लेग जंगली चूहों में पाई गई थी। उनके जरिए यह प्लेग बैक्टीरिया इंसान के शरीर में प्रवेश करता है। संक्रमण वाले बैक्टीरिया इंसान के खून में मिलकर बीमारी को पैदा करते हैं। इस तरह से इंसान भी प्लेग से ग्रसित हो जाता है। ऐसा चूहों के मरने के दो-तीन हफ्ते बाद होता है।

बुबोनिक प्लेग के लक्षण क्या हैं?

इस बीमारी के दौरान इंसान को तेज बुखार और शरीर के कई हिस्सों में असहनीय दर्द होता है। साथ ही सांस लेने में समस्या होती है। इसके अलावा दो से तीन दिन में शरीर में गांठें पड़ने लगती हैं। ये गाठें 14 दिन में ही पक जाती हैं। इसके साथ नाक और उंगलियां भी काली पड़ने लगती हैं।