कोरोना संकट से निपटने में नाकाम रही इमरान सरकार, सेना को दी गई अहम जिम्मेदारियां

Highlights

  • कारोबारियों और कट्टरपंथियों को समझाने में सेना निभाएगी अहम भूमिका।
  • महामारी से लड़ने में नियमों का पालन कराने के लिए सेना की ली जा रही है मदद।
  • इमान खान (Imran khan) ने अपनी नाकामी को छिपाने के लिए मीडिया टीम को बदला।

By: Mohit Saxena

Updated: 28 Apr 2020, 09:06 AM IST

इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) में कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ सरकार के कमजोर फैसलों ने स्थिति नियंत्रण से बाहर कर दी है। ऐसे में पाक पीएम इमरान खान (Imran Khan) की नाकामी को देखते हुए एक बार फिर सेना ने सत्ता में दखल देना शुरू कर दिया है। सेना को डर है कि इस महामारी के कारण पाकिस्तान में विस्टफोटक स्थिति न पैदा हो जाएं।

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गौरतलब है कि इमरान सरकार ने लॉकडाउन (Lockdown) का कड़ाई से पालन नहीं किया है, बीते 22 मार्च को इमरान खान ने पूरे देश मेें लॉकडाउन की मुखालफत करते हुए कहा था कि ऐसा करने से लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उनकी दलील थी कि लॉकडाउन के कारण लाखों मजदूर परिवार प्रभावित होंगे। बाद में सेना ने उनकी बात न मानते हुए देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान किया।

सेना की मदद से भीड़ हटाने में लगे

इमरान खान बार-बार सही फैसले लेने में असमर्थ रहे हैं। हाल में मस्जिदों में नमाज को लेकर उनका रवैया ढुलमुल रहा है। कोरोना वायरस से दुनिया में फैले हालात को देखकर भी उन्होंने मस्जिदों को नमाज के लिए खुला रखने के आदेश दिए हैं। इसका विरोध यहां के चिकित्सा अधिकारी भी कर रहे हैं। ऐसे में कई प्रांत सेना की मदद से मस्जिदों में भीड़ को हटाने में लगे हैं। सिंध में स्थिति खराब होने के कारण यहां का प्रशासन सेना की मदद से कड़े कदम उठा रहा है।

67 वर्षीय इमरान कई मोर्चो पर फेल साबित हुए हैं। खान कश्‍मीर मसले पर अंतरराष्‍ट्रीय समर्थन जुटाने में भी नाकाम साबित हुए हैं। अब उनकी असल परीक्षा एफएटीएफ की ग्रे लिस्‍ट से पाकिस्‍तान को बाहर निकालने की है जिसकी संभावना कम ही नजर आती है। पीएम की सरकती कुर्सी की ओर इशारा पीपीपी के सांसद नफीस शाह ने भी कर दी है। उन्‍होंने कहा है कि यदि इमरान फैसले नहीं ले पा रहे तो उनकी जगह कोई और लेगा।

सेना को अधिकृत किया

पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था भी गर्त में जा चुकी है। आइएमएफ ने साफ लफ्जों में कहा है कि साल 2020 में पाकिस्‍तान की जीडीपी 1.5 फीसद रहेगी। इमरान खान लगातार महामारी से लड़ने के नाम पर विश्व समुदाय से चंदा एकत्र करने की कोशिश कर रहे हैं। मगर इसमें वे नाकाम साबित हुए हैं। उन्हें अभी तक किसी भी देश का समर्थन नहीं मिला है। यहां तक की उसका सबसे अच्छा दोस्त चीन भी सामने नहीं आया है। नतीजन इमरान सरकार अब सेना के आगे सरेंडर होती दिख रही है। पाकिस्तान सरकार ने कारोबारियों के मामलों और कट्टरपंथियों को संभालने के लिए अब सेना को अधिकृत कर दिया है।

मीडिया टीम को बदला

कोरोना वायरस समेत तमाम मुद्दों पर विफलता हाथ लगने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को लगातार अपने ही देश में आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अपनी नाकामी को छिपाने के लिए उसने मीडिया टीम को ही बदल दी है। साल 2018 में सत्ता में आने के बाद यह दूसरा मौका है, जब इमरान ने अपनी मीडिया टीम को बदला है। इमरान खान ने सीनेट सदस्य शिब्ली फराज को पाकिस्तान का नया सूचना मंत्री नियुक्त कर दिया है। इस दौरान सूचना और प्रसारण मामले में पीएम की विशेष सलाहकार डॉ. फिरदौस आशिक अवान को भी हटा दिया गया है। उनकी जगह सेना के पूर्व प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) असीम सलीम बाजवा ने ली है।

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