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पीएम मोदी ने बांग्लादेश की आजादी के लिए किया था सत्याग्रह, ढाका में बताई पूरी कहानी

PM Modi Bangladesh Visit: दो दिवसीय विदेश दौरे पर बांग्लादेश पहुंचे पीएम मोदी पड़ोसी देश की आजादी के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।

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Dhaka: PM Modi at Bangladesh National Day program with PM Sheikh Hasina

ढाका। कोरोना काल शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार शुक्रवार को दो दिवसीय विदेश दौरे पर बांग्लादेश पहुंचे। पीएम मोदी बांग्लादेश की आजादी के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक मजबूत करने के संबंध में कई बातें कहीं।

अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने एक बड़ी बात बताई और कहा कि उन्होंने बांग्लादेश की आजादी के समय सत्याग्रह किया था। ढाका में पीएम मोदी ने कहा कि बांग्लादेश की आजादी के लिए संघर्ष में शामिल होना, उनके जीवन के भी पहले आंदोलनों में से एक था। उस वक्त उनकी उम्र 20-22 साल रही होगी जब उन्होंने अपने कई साथियों के साथ बांग्लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था।

Lives Update:

- राष्ट्रपति अब्दुल हामिद जी, प्रधानमन्त्री शेख हसीना जी और बांग्लादेश के नागरिकों का मैं आभार प्रकट करता हूं। आपने अपने इन गौरवशाली क्षणों में, इस उत्सव में भागीदार बनने के लिए भारत को सप्रेम निमंत्रण दिया।

- मैं सभी भारतीयों की तरफ से आप सभी को, बांग्लादेश के सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई देता हूं। मैं बॉन्गोबौन्धु शेख मुजिबूर रॉहमान जी को श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने बांग्लादेश और यहां के लोगों के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।

- मैं आज भारतीय सेना के उन वीर जवानों को भी नमन करता हूं जो मुक्तिजुद्धो में बांग्लादेश के भाइयों-बहनों के साथ खड़े हुये थे। जिन्होंने मुक्तिजुद्धो में अपना लहू दिया, अपना बलिदान दिया, और आज़ाद बांग्लादेश के सपने को साकार करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।

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- बांग्लादेश के मेरे भाइयों और बहनों को, यहां की नौजवान पीढ़ी को मैं एक और बात बहुत गर्व से याद दिलाना चाहता हूं। बांग्लादेश की आजादी के लिए संघर्ष में शामिल होना, मेरे जीवन के भी पहले आंदोलनों में से एक था।

- मेरी उम्र 20-22 साल रही होगी जब मैंने और मेरे कई साथियों ने बांग्लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था।

- यहां के लोगों और हम भारतीयों के लिए आशा की किरण थे- बॉन्गोबौन्धु शेख मुजिबूर रॉहमान। बॉन्गोबौन्धु के हौसले ने, उनके नेतृत्व ने ये तय कर दिया था कि कोई भी ताकत बांग्लादेश को ग़ुलाम नहीं रख सकती।

- ये एक सुखद संयोग है कि बांग्लादेश के आजादी के 50 वर्ष और भारत की आजादी के 75 वर्ष का पड़ाव, एक साथ ही आया है। हम दोनों ही देशों के लिए, 21वीं सदी में अगले 25 वर्षों की यात्रा बहुत ही महत्वपूर्ण है। हमारी विरासत भी साझी है, हमारा विकास भी साझा है

- आज भारत और बांग्लादेश दोनों ही देशों की सरकारें इस संवेदनशीलता को समझकर, इस दिशा में सार्थक प्रयास कर रही हैं। हमने दिखा दिया है कि आपसी विश्वास और सहयोग से हर एक समाधान हो सकता है। हमारा Land Boundary Agreement भी इसी का गवाह है।

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