
नई दिल्ली। ह्यूमन राइटस वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने कहा कि म्यांमार में अगस्त के अंत में भड़की हिसा के बाद से अब तक करीब 300 रोहिग्या गांवों को जला दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकार समूह ने राखिने राज्य में सेटेलाइट तस्वीरों के जरिए आंशिक रूप से और पूरे जले हुए 288 गांव की पहचान की है, जहां लाखों रिहाइशी ढांचों को तबाह किया जा चुका है।
चार सप्ताह में 4 लाख रोहिंग्या बांग्लादेश गए
एचआरडब्ल्यू के एशिया उप निदेशक फिल राबर्टसन ने कहा कि यह नवीनतम सेटेलाइट तस्वीरें बता रही हैं कि क्यों सिर्फ चार सप्ताह में ही करीब 5 लाख रोहिंग्या बांग्लादेश भागने पर बाध्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि म्यांमार सेना ने रोहिंग्या समुदाय के सैकड़ों गांवों को तबाह कर दिया है। साथ ही हत्याओं, दुष्कर्म और मानवता के खिलाफ दूसरे अपराधों ने रोहिग्याओं को जान बचाने के लिए भागने को मजबूर कर दिया।
बौद्ध लोगों के घर छुए तक नहीं गए
एचआरडब्ल्यू ने कहा कि करीब 90 फीसदी प्रभावित गांव मोंग्डॉ शहर के हैं। उन्होंने कहा कि इन इलाकों में रोहिंग्या लोगों के घरों को जला दिया गया जबकि उसी इलाके में बौद्ध लोगों के घरों को छुआ तक नहीं गया। रपट में यह भी कहा गया है कि कम से कम 66 गांवों को 5 सितम्बर के बाद जलाया गया, हालांकि रोहिंग्या विद्रोहियों द्वारा हमले के बाद 25 अगस्त को शुरू हुई सरकार की कार्रवाई को तब तक समाप्त घोषित कर दिया गया था। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, हिसा के बाद 530,000 से ज्यादा रोहिंग्या लोगों को बांग्लादेश भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। राखिने में हिंसा के भड़कने से पहले 10 लाख से ज्यादा रोहिग्या रह रहे थे।
नो मैन्स लैंड पर फंसे 10 हजार रोहिग्या
वहीं दूसरी ओर करीब 10 हजार रोहिग्या लोग म्यांमार और बांग्लादेश के बीच नो मैन्स लैंड में फंसे हुए हैं, जहां उन्हें रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है।सीमा प्राधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़े एक 45 मीटर चौड़े क्षेत्र जिसे 'नो मैन्स लैंड' माना जाता है, वहां न तो बांग्लादेश और न ही म्यांमार का प्रभावी नियंत्रण है।
1,360 परिवारों को सहायता का इंतजार
बांग्लादेश के बंदरबन जिले में घूम धूम सीमा चौकी के स्थानीय सरकारी प्रतिनिधि एकेएम जहांगीर अजीज ने कहा, "वे नो मैन्स लैंड पर इंतजार कर रहे हैं क्योंकि उनके लिए कहीं और कोई स्थान शायद बचा ही नहीं है।" अजीज ने कहा, "इस वक्त नो मैन्स लैंड पर 1,360 परिवार रह रहे हैं, जिनकी संख्या लगभग दस हजार के करीब है। अजीज ने कहा कि हालांकि बांग्लादेश प्राधिकारी रोहिग्याओं को देश में घुसने से नहीं रोक रहे हैं, लेकिन शरणार्थियों को नो मैन्स लैंड में ही रहना उचित लग रहा है क्योंकि वहां उन्हें आईसीआरसी द्वारा सहायता मिल रही है।
Published on:
17 Oct 2017 04:31 pm
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