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इमरान खान ने कश्मीर पर दुखड़ा रोया, कहा-अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत के बाजार के आगे झुका

एक साक्षात्कार में पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने दिया बड़ा बयान पाक पीएम ने कहा छह सालों में भारत में आए हैं कई बदलाव

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Mohit Saxena

Sep 29, 2019

imran khan

वॉशिंगटन। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के आखिरकार मान ही लिया कि उसकी कश्मीर मसले पर कोई सुनने वाला नहीं है। विदेशी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कभी भी कश्मीर को जरूरी मुद्दा नहीं समझा। उन्होंने कहा कि बीते छह सालों में भारत काफी बदला है और उन्हें डर है कि वह ज्यादा तेजी से बदलता जा रहा है। पाकिस्तानी पीएम ने साथ ही साफ किया वह पीएम नरेंद्र मोदी से कोई मुलाकात नहीं करने वाले हैं।

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गौरतलब है कि पाक पीएम इमरान खान ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपना संबोधन दिया। इसमें उन्होंने कश्मीर को लेकर दुनिया से सहयोग मांगा। इस दौरान इमरान ने भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला और कश्मीर के लिए सभी देशों से बोलने की अपील की। मगर इस सम्मेलन के बाद इमरान को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।

इमरान ने कहा कि कश्मीर में भारत ने जो किया है उसके बाद उनका प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करने का कोई सवाल ही नहीं है। इस मुद्दे पर भारत का कहना है कि पाकिस्तान के साथ तब तक वार्ता शुरू करने का सवाल ही नहीं उठता है। जबतक वह सीमापार आतंकवाद को रोकने के लिए ठोस कदम नही उठाता।

यह पूछे जाने पर कि उन्हें क्यों लगता है कि कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई हो-हल्ला नहीं है। इस पर खान ने कहा कि दुनिया भर के नेता भारत को एक अरब से ज्यादा लोगों वाले बाजार के तौर पर देख रहे हैं। खान ने कहा कि बहुत से नेताओं को इसका एहसास नहीं है। वह भारत को एक बाजार के रूप में देख रहे हैं। यह दुखद बात है।

मोदी के आगे मजबूर इमरान

एक सवाल के जवाब में खान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर पर कोई अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि वह कहते रहे हैं कि यह द्विपक्षीय संबंध हैं। जब हम उनसे बात करने की कोशिश करते हैं तो वह कहते हैं कि यह एकपक्षीय मुद्दा है। इसलिए वह कुछ हासिल नहीं कर रहे, क्योंकि हम घूम फिर कर वहीं हैं।' भारत ने पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द कर दिया था। इसे लेकर पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों उठा रहा है। इस पर भारत हमेशा से इसे अपना अंदरूनी मामला बताता रहा है, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई गुंजाइश नहीं है।