
नई दिल्ली: ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने रविवार को अरब सागर में स्थित अपने मुख्य बंदरगाह के नए एक्सटेंशन का उद्घाटन किया। यह विस्तार चाबहार बंदरगाह की क्षमता को और ज्यादा बढ़ा देगा। ओमान की खाड़ी में इस बंदरगाह की मदद से पाकिस्तान को खतरा मंडराने लगा है। दरअसल भारत के लिए कई मायने में चाबहार बंदरगाह अहम है, पहला कि भारत भी इरान के साथ इस परियोजना का अहम सहयोगी है। इस बंदरगाह के बनने से भारत और अफगानिस्तान के बीच सीधा व्यापार किया जाएगा। पाकिस्तान पर पूरी तरह से निर्भरता खत्म हो जाएगी। इस बंदरगाह के चालू होने से भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच सीधे तौर पर व्यापारिक रास्ते खुलेंगे।
उल्लेखनीय है कि चाबहार बंदरगाह के उद्घाटन से पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ से मुलाकात की थी। बैठक के दौरान चाबहार बंदरगाह परियोजना के क्रियान्वयन समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की गयी थी।
समारोह में कई देशों के प्रतिनिधित्व थे मौजूद
शाहिद बहेश्ती बंदरगाह के नाम से जाने जाने वाले इस बंदरगाह के उद्घाटन कार्यक्रम में कई देशों के राजदूत और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। ईरान के सरकारी टीवी ने कहा कि इस समारोह में भारत, कतर, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और कई अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। भारत का प्रतिनिधित्व पोत परिवहन राज्यमंत्री पोन राधाकृष्णन ने किया। राष्ट्रपति रूहानी के कार्यालय के अनुसार, उन्होंने उद्घाटन समारोह में कहा, ‘‘क्षेत्रीय मार्गों पर भूमि, समुद्र और हवा के जरिये आवागमन एवं परिवहन की सुविधा होनी चाहिए।’’
पाकिस्तान का बढ़ा तनाव
गौरतलब है कि अभी तक भारत को अफगानिस्तान तक निर्यात करने के लिए पाकिस्तान हो कर जाना पड़ता था। लेकिन इरान के इस कदम से भारत समुद्री रास्ते के जरिए सीधे ईरान के चाबहार बंदरगाह पर माल भेजेगा और फिर वहां से ट्रकों द्वारा अफगानिस्तान पहुंचेगा। इससे भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार तो बढ़ेंगे ही साथ ही कूटनीतिक संबंध भी मजबूत होगी। चाबहार बंदरगाह की अहम बात यह भी है कि यह पाकिस्तान में चीन से चलने वाले ग्वादर पोर्ट से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर ही है। ऐसे में पाकिस्तान और भारत के बीच बढ़े तनाव को कम करने के लिए यह अहम होगा।
Published on:
03 Dec 2017 10:40 pm
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