मालदीव में गहराया राजनीतिक संकट, पूर्व राष्ट्रपति ने भारत से मांगी सैन्य मदद

मालदीव में राजनीतिक संकट बढ़ता ही जा रहा है, ऐसे में पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने अब भारत से मदद मांगी है।

By: Chandra Prakash

Updated: 07 Feb 2018, 10:22 AM IST

नई दिल्ली: मालदीव में राजनीतिक संकट बढ़ता ही जा रहा है। हर तरफ से निराश होने के बाद मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने मंगलवार को अपने देश में उत्पन्न संकट को समाप्त करने के लिए भारत सरकार से सैन्य हस्पक्षेप का आग्रह किया। भारत सरकार मालदीव संकट पर नजर बनाए हुए है। एक दिन पहले राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने देश में आपातकाल की घोषणा की और देश के प्रधान न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीश को जेल में बंद कर दिया।


भारत से सेना भेजने की मांग
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने ट्वीट कर कहा कि वह 'मालदीव के लोगों की ओर से भारत से 'सेना समर्थित' राजनयिक भेजने का आग्रह कर रहे हैं ताकि पूर्व राष्ट्रपति मैमून अब्दुल गयूम समेत राजनीतिक बंदियों व न्यायाधीशों को रिहा करवाया जा सके।"

आत्म-निर्वासित हैं पूर्व राष्ट्रपति नशीद
ब्रिटेन में आत्म-निर्वासित जीवन जी रहे नशीद ने अमेरिका से भी 'मालदीव सरकार के नेताओं के अमेरिकी बैंकों के सभी वित्तीय लेन-देन पर रोक' लगाने की अपील की है। मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह नशीद समेत विपक्षी पार्टियों के नौ सदस्यों को रिहा करने और 12 निष्कासित सांसदों को पद पर बहाल करने के आदेश दिए थे। इस आदेश के विरोध में सोमवार रात को राष्ट्रपति यामीन ने देश में 15 दिनों के आपातकाल की घोषणा की।


मुख्य न्यायाधीश गिरफ्तार, कोर्ट बंद
मालदीव पुलिस ने तड़के करीब तीन बजे प्रधान न्यायाधीश अब्दुल्ला सईद और न्यायमूर्ति अली हमीद को गिरफ्तार कर लिया। इससे सात घंटे पहले सुरक्षा बलों ने परिसर को अपने कब्जे में ले लिया था। सेना ने कोर्ट इमारत को घेर लिया था और कर्मचारियों व न्यायाधीशों को सेना की निगरानी में रखा गया था। न्यायाधीशों को बाद में राजधानी माले से बाहर ले जाकर जेल में बंद कर दिया गया।


सोमवार रात को लगा आपातकाल
न्यायिक प्रशासक हसन सईद को भी मध्यरात्रि के बाद गिरफ्तार कर लिया गया और उनके घर पर दो बार छापा मारा गया। मालदीव पुलिस सेवा ने कहा था कि ऐसे कुछ सबूत हैं जो सईद और हमीद के खिलाफ हैं। राष्ट्रपति यामीन ने सोमवार रात को आपातकाल की घोषणा की थी, जिससे तहत सुरक्षा बलों को लोगों को गिरफ्तार करने और लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति मिली।


सरकार ने हर विरोधी को जेल में डाला
मालदीव इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, आपातकाल का विरोध करने वाले और विपक्षी पार्टियों के साथ हाथ मिलाने वाले पूर्व राष्ट्रपति मामून अब्दुल गयूम को भी सोमवार रात को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार होने से पहले गयूम ने एक वीडियो रिलीज कर लोगों से 'मजबूत बने रहने' का आग्रह किया था। उनके दामाद मोहम्मद नदीम को भी गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों पर सांसदों को घूस देने और सरकार के खिलाफ साजिश रचने का आरोप है। गयूम और नदीम को धूनीधो द्वीप में एक जेल ले जाया गया है।


संसद भी हुआ स्थगित
मालदीव में पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक बंदियों को रिहा करने के आदेश के बाद यहां राजनीतिक संकट उत्पन्न हो गया है। कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति नशीद और पूर्व उपराष्ट्रपति अहमद अदीब को भी आधिकारिक रूप से रिहा करने के आदेश दिए थे। अदालत ने अपने संक्षिप्त बयान में कहा था कि उन्हें बिना किसी प्रभाव के फिर से मुकदमे चलाए जाने तक निश्चित ही रिहा किया जाना चाहिए। सरकार ने पहले ही संसद को स्थगित कर दिया है और सेना को राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने के सुप्रीम कोर्ट के किसी भी प्रयास को रोकने का आदेश दिया है। इससे पहले यामीन ने सोमवार को कोर्ट के आदेश को लागू करने में होने वाली परेशानी के संबंध में सुप्रीम कोर्ट को तीन पन्नों का पत्र लिखा था।


भारत, चीन और अमरीका ने नागरिकों के लिए जारी किया अलर्ट
अमरीकी विदेश विभाग ने मालदीव के घटनाक्रम को 'परेशानी करने वाला और निराशा भरा' बताया। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने ट्वीट कर कहा, "दुनिया सबकुछ देख रही है।" ब्रिटिश विदेश सचिव बोरिस जॉनसन ने यामीन से देश में आपातकाल हटाने की मांग की है। जॉनसन ने अपने बयान में कहा, "मालदीव में लोकतांत्रिक संस्थान को क्षति पहुंचाना और संसदीय प्रकिया का दुरुपयोग काफी चिंताजनक है।" भारत, चीन और ब्रिटेन ने अपने नागरिकों के लिए मालदीव की यात्रा के संबंध में चेतावनी जारी की है।

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