26 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

4 साल की बच्ची से रेप, फिर ईंट-पत्थर से सिर पर वार, अब SIT करेगी जांच, SC कोर्ट ने 3 महिला अफसरों को दी जिम्मेदारी

Ghaziabad Minor Rape Murder Case: गाजियाबाद में 4 साल की बच्ची के रेप-मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी डीजीपी को 3 महिला अधिकारियों की SIT बनाने का आदेश दिया है। पुलिस की भूमिका पर सवाल।

2 min read
Google source verification
Ghaziabad Minor Rape Murder Case

4 साल की बच्ची के रेप-मर्डर केस को SIT करेगी जांच

Supreme Court orders: गाजियाबाद के सिहानीगेट इलाके में 4 साल की बच्ची के साथ हुए रेप और मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी (DGP) को तत्काल SIT (विशेष जांच दल) गठित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि इस टीम में तीन वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी शामिल होंगी, जो पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच करेंगी।

पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल

आपको बता दें कि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर नाराजगी जताई। पीड़ित पक्ष के वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरुआत में रेप की धाराएं और पॉक्सो एक्ट (POCSO) नहीं लगाया था। घटना 16 मार्च की है, जबकि एफआईआर (FIR) 17 मार्च को दर्ज की गई। आरोप है कि पुलिस ने मदद करने के बजाय पीड़ित पिता को डराया-धमकाया और मामले को दबाने की कोशिश की।

निजी अस्पताल और 'जिंदा' बच्ची का पेच

कोर्ट में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। वकील ने बताया कि जब बच्ची को घटना के बाद निजी अस्पताल ले जाया गया था, तब वह जीवित थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया है कि उस निजी अस्पताल की भूमिका की भी गहराई से जांच की जाए। क्या वहां बच्ची को सही इलाज मिला या लापरवाही बरती गई, इसकी रिपोर्ट भी मांगी गई है।

क्या थी हैवानियत की वो रात?

सिहानीगेट इलाके में रहने वाले एक मजदूर की 4 साल की बेटी को पड़ोस में रहने वाला गौरव प्रजापति (24) टॉफी दिलाने के बहाने ले गया था। घर से महज 300 मीटर दूर एक खाली प्लॉट में उसने मासूम के साथ दरिंदगी की और फिर पत्थर से वार कर उसका चेहरा कुचल दिया। रात 9 बजे बच्ची खून से लथपथ हालत में मिली थी, जिसकी इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई।

आरोपी का 'एनकाउंटर' और रिकवरी

पुलिस ने आरोपी गौरव को गिरफ्तार करने के लिए मुठभेड़ की बात कही थी। पुलिस के मुताबिक, पहले गौरव के दोनों पैरों में गोली लगी थी। अगले दिन जब उसे हथियार बरामदगी (रिकवरी) के लिए ले जाया गया, तो उसने पुलिस पर फायरिंग की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।

तीन महिला अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तीन वरिष्ठ महिला अधिकारियों की एक विशेष एसआईटी का गठन किया जाए, जो बिना किसी स्थानीय पुलिसिया दबाव के पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करेगी। अदालत ने पीड़िता के परिवार और सभी मुख्य गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ निजी अस्पतालों की भूमिका की भी गहराई से जांच करने को कहा है, ताकि इंसाफ की प्रक्रिया में किसी भी तरह की कोताही न बरती जा सके।

बड़ी खबरें

View All

नई दिल्ली

दिल्ली न्यूज़

ट्रेंडिंग