
यांगून : म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ की गई क्रूरताओं के रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। हाल ही में रॉयटर के पत्रकारों ने बताया था कि किस तरह 10 रोहिंग्या मुसलमानों को मार कर एक ही कब्र में दफना दिया गया। इसमें बौद्ध ग्रामीणों के साथ-साथ सेना की भी भूमिका का खुलासा हुआ था। अब एक बार फिर अपना सबकुछ सबकुछ छोड़ शरणार्थी बनने को मजबूर रोहिंग्या मुसलमानों के साथ क्रूरता की नई घटनाओं का खुलासा हुआ है। वहां की सेना रोहिंग्या समुदाय के गांवों को जला कर नष्ट कर रही है। उसके बाद घर के बचे अवशेषों पर बुल्डोजर भी चला दिया है।
सैटेलाइट इमेज से मिली जानकारी
हाल ही में सैटेलाइट इमेजों से मिली जानकारी के मुताबिक म्यांमार में रोहिंग्या बहुल गांवों को बुलडोजर से ढहाया जा रहा है। म्यांमार की आर्मी ने रोहिंग्या बहुल रखाइन प्रांत में इमारतों को ढहाने का ऑपरेशन शुरू कर दिया है। यह रोहिंग्या समुदाय की आखिरी निशानी भी है। कोलाराडो के डिजिटल ग्लोब की ओर से जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों में कई गांव अब खाली नजर आ रहे हैं। म्यांमार की सरकार ने मामले पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि इस क्षेत्र का पुनर्निमाण किया जा रहा है। किसी का घर उजाड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है।
रोहिंग्याओं ने कहा कि उनकी संस्कृति मिटाने की है कोशिश
इस पर जब ग्लोबल मीडिया ने रोहिंग्या समुदाय के लोगों से बात की तो उन्होंने कहा कि म्यांमार में हमारी संस्कृति की आखिरी निशानी मिटाई जा रही है, ताकि हम फिर से वापस अपने गांव न लौट सकें। एजेंसी का एक महिला ने बताया कि जब वह बांग्लादेश से अपने घर मायिन ह्लट वापस लौटी थी, तब उसे वहां की हालत देखकर वह काफी हैरानी है। उसने बताया कि बहुत से घरों को पिछले ही साल जला दिया गया और सब कुछ खत्म कर दिया गया। यहां तक कि वहां पेड़ों को भी नष्ट कर दिया गया। महिला ने बताया कि उन्होंने बुलडोजर से सब कुछ नष्ट कर दिया। मैंने बड़ी मुश्किल से अपना घर पहचाना। सभी घर अब खत्म हो चुके हैं। सारी यादें भी जा चुकी हैं। उन्होंने सब कुछ खत्म कर दिया।
Published on:
24 Feb 2018 07:09 pm
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