
नेपाल में लागू हुआ नया क्रिमिनल कोड, प्रेस की आजादी पर खतरा
काठमांडू। नेपाल में प्रेस की आजादी खतरे में नजर आ रही है। दरअसल वहां की कम्युनिस्ट सरकार ने इस मामले में एक नया क्रिमिनिल कोड पेश किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों में इसकी जमकर आलोचना हो रही है।
ऐसा है नया प्रावधान
इस नए कानून को वहां के एक्टिविस्ट और मीडिया संस्थान ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरा करार दिया है। इस कानून में गोपनीय सूचना को छापने करने, बिना इजाजत के ऑडियो रिकॉर्ड करने, या फोटो खींचने जैसे अपराध के लिए जेल की सजा का प्रावधान मंजूर किया गया।
शनिवार से लागू हो रहा नया क्रिमिनल कोड
प्रावधान का विरोध इतना बढ़ गया है कि वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि कम्युनिस्ट नीत दो तिहाई बहुमत वाली सरकार नए कानूनों का इस्तेमाल सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों के खिलाफ कर सकती है। दरअसल, इससे पहले भी इस सरकार ने खुद के प्रति असहमति जताने वालों के लिए असहिष्णुता दिखाई है। नया क्रिमिनल कोड और क्रिमिनल प्रॉसिजर कोड देश जो पुरानी विधिक प्रणाली की जगह लेने वाला है वो शनिवार से लागू हो जाएगा।
एक साल की कैद या 10,000 रुपये का जुर्माना
नए कोड के मुताबिक नियमों की अनदेखी करने वाले लोगों को एक साल की कैद या 10,000 रुपये का जुर्माना, या दोनों का सामना करना पड़ सकता है। इस बारे में वकील दिनेश त्रिपाठी का कहना है कि इन कानूनों का दुरुपयोग पत्रकारों को चुप कराने और खोजी पत्रकारिता पर अनायास लगाम कसने के लिए किया जा सकता है। प्रेस की आजादी को दांव पर लगाने वाले इस कानून पर नेपाल प्रेस यूनियन के अध्यक्ष बद्री सिगदेल ने भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह संविधान का पूरी तरह से उल्लंघन करता है और इसका उद्देश्य फ्री प्रेस पर कंट्रोल करना है जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
Published on:
18 Aug 2018 01:25 pm
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