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Pakistan ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चीन को अवैध खनन की दी खुली छूट, अरबों डॉलर का अनुबंध किया

Highlights अवैध खनन मामले की पोल गिलगित बाल्टिस्तान (Gilgit baltistan) क्षेत्र के एक प्रमुख राजनीतिक दल (यूकेपीएनपी) ने खोली है। चीन की फर्मों को अवैध रूप से सोना, यूरेनियम और मोलिब्डेनम का खनन करने के लिए जमीन लीज पर दे रखी है।

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Imran khan

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और शी जिनपिंग।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) ने चीन को अपने यहां प्राकृतिक संसाधन को दोहन करने की खुली छूट दे रखी है। भले ही इसमें अंतरराष्ट्रीय कानूनों (Internatinal Law) का उल्लंघन क्यों न हो, वह तो स्वयं बनाए संविधान को भी ताक पर रखकर अपने कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान (जीबी) क्षेत्रों में भी संसाधनों को लूटने की छूट दे रहा है। यही नहीं, इस्लामाबाद ने डियामर डिवीजन में एक बड़ा बांध बनाने के लिए बीजिंग (Bejing) के साथ अरबों डॉलर का अनुबंध कर लिया है। जबकि यह इलाका कानूनी रूप से भारत का है।

अवैध खनन मामले की पोल गिलगित बाल्टिस्तान क्षेत्र के एक प्रमुख राजनीतिक दल यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के मुख्य प्रवक्ता ने खोली है। पाकिस्तान सरकार ने गिलगित और बाल्टिस्तान में चीन की फर्मों को अवैध रूप से सोना, यूरेनियम और मोलिब्डेनम का खनन करने के लिए जमीन लीज पर दे रखी है। इससे पर्यावरण को भी काफी नुकसान होने की संभावना है। यह उसके मांनदंडों के अनुरूप नहीं है।

पाकिस्तान को नहीं अधिकार

अजीज के अनुसार अगले महीने जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में इस प्राकृति संसाधनों की लूट का खुलासा करेंगे। पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 257 का हवाला देकर अजीज का कहना है कि सरकार को जीबी क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों को लूटने का कोई हक नहीं है।

अजीज के अनुसार यहां नियमों को तांक पर रखकर अवैध खनन का प्रयास हो रहा है। यहां पर मीडिया को जाने पर मनाही है और जानबूझकर इस सच्चाई को छिपाने में लगा हुआ है। वहीं इस क्षेत्र में आवाज उठाने वालों को दबा दिया जाता है या दंडित किया जा रहा है। इन परिस्थितियों में हर कोई निर्णय के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं रखता हैं प्राकृतिक संसाधनों को लूटा जा रहा है। पाक चीन के हाथ का खिलौना बनकर रह गया है।

स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी

स्विजरलैंड के जिनेवा में रहने वाले यूकेपीएमपी नेता का कहना है कि स्थानीय लोगों इस बारे में कोई भी सलाह नहीं ली जाती है। उनके हितों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाता है। गौरतलब है कि उत्तरी क्षेत्रों में गिलगित, बाल्टिस्तान और डियामर में मीडिया को पूरी तरह बैन किया गया है। इसे पाक सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

गिलगित-बाल्टिस्तान में प्राकृतिक संसाधानों का उपयोग पाकिस्तान बिजली आपूर्ति भी करना चाहता है। पाकिस्तान 45 हजार मेगावाट बिजली पैदा करने की कोशिश में जुटा हुआ है। इस क्षेत्र में एक स्थानीय सरकार भी मौजूद है मगर इसका पूरा नियंत्रण पाकिस्तान से हो रहा है।