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चीन की तारीफ में पाक पीएम ने पढ़े कसीदे, कहा- गेम चेंजर साबित होगा सीपीईसी प्रोजेक्ट

चीन-पाक के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट सीपीईसी को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खक्कान अब्बासी ने देश के लिए गेम चेंजर बताया है।

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Mohit sharma

Apr 09, 2018

Pakistan PM

नई दिल्ली। चीन-पाक के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट सीपीईसी को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने देश के लिए गेम चेंजर बताया है। पाक पीएम ने कहा कि बीआरआई और सीपीईसी एक परिवर्तनकारी प्रोजेक्ट है, जो बीजिंग और इस्लामाबाद के बीच व्यापारिक सहयोग को मजबूती प्रदान करेगा। अब्बासी ने बीआरआई की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए कहा कि यह वास्तव में वैश्विक परियोजना है, जो भौगोलिक रूप से भिन्न-भिन्न स्थलों पर रह रहे लोगों को हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

ऊर्जा परियोजनाओं को दी गति

पाक पीएम अब्बासी ने कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के बाद पॉवर लाइंस, बेहतरी सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। बीआरआई की प्रमुख परियोजना के रूप में, चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) व्यापक आर्थिक सहयोग के लिए दोनों देशों के दृष्टिकोण का प्रतीक है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के अंतर्गत ऊर्जा परियोजनाओं ने पाकिस्तान में ऊर्जा संकट को कम किया है और हम राष्ट्रीय ग्रिड में हजारों मेगावाट बिजली जोड़ने में सफल रहे हैं। 62 अरब डालर के आर्थिक गलियारे की ऊर्जा परियोजनाओं की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, "सीपीईसी ऊर्जा परियोजनाओं ने देश के जलविद्युत, पवन, सौर और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश के साथ पाकिस्तान के ऊर्जा मिश्रण को विविधता प्रदान की है, जो कि संतोष की बात है।

क्या है सीईपीसी प्रोजेक्ट

बता दें कि ओबोर (वन बेल्ट, वन रोड) चीन का अति महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसको चीन प्राचीन सिल्क रूट की तर्ज पर विकसित कर रहा है। इस रूट के जरिए चीन मध्य एशिया से लेकर यूरोप और फिर अफ्रीका तक स्थलीय व समुद्री मार्ग तैयार करने में जुटा है। चीन की ओर से इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य व्यापार को बढ़ावा देने का प्रयास बताया जा रहा है। ओबोर के ही अंतर्गत् चीन पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को विकसित कर रहा है। इसके लिए चीन ने पाकिस्तान को 46 हजार करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद मुहैया कराई है। सीईपीसी में चीन ग्वादर पोर्ट से एक मार्ग पाकिस्तान के भीतर होकर अपने सीमा तक लेकर जाएगा। चीन के इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई है, क्योंकि ग्वादर पोर्ट से शुरू होने वाला यह मार्ग पाकिस्तान के भीतर और फिर पीओके जिसको भारत अपना हिस्सा बताता है, से होते हुए चीन पहुंचेगा