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पाकिस्तान मेरा देश है, वतन लौटकर पीएम पद के लिए लडूंगी चुनाव : मलाला यूसुफजई

मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने वतन पाकिस्तान हमेशा के लिए वापस लौटना चाहती हूं और प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव भी लड़ना चाहती हूं।

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malala ysufazai

नई दिल्ली। नोबेल पुरस्कार विजेता पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई हमेशा के लिए अपने वतन वापस लौटना चाहती हैं और प्रधानमंत्री भी बनना चाहती हैं। पाकिस्तान मीडिया को दिये एक साक्षात्कार में मलाला यूसुफजई ने कहा " मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने वतन पाकिस्तान हमेशा के लिए वापस लौटना चाहती हूं और प्रधानमंत्री के लिए चुनाव भी लड़ना चाहती हूं। यही मेरी आगे की योजना है। उन्होंने कहा कि बाकि पाकिस्तानियों की तरह ही पाकिस्तान भी मेरा देश है और मुझे भी ऐसा करने का पूरा अधिकार है। " बता दें कि शनिवार को मलाला अपने परिवार के साथ खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले में स्थित अपने घर मिंगोरा गई थीं। जहां उन्होंने पाकिस्तान मीडिया को दिये एक साक्षात्कार के दौरान ये सभी बातें कही।
अब पाकिस्तान बदल रहा है : मलाला
आपको बता दें कि सबसे कम उम्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली मलाला यूसुफजई 6 साल बाद गुरुवार को अपने वतन पाकिस्तान लौटी हैं। वे 2 अप्रैल तक यहां रहेंगी और फिर वापस लौट जाएंगी। बता दें कि 2012 में लड़कियों को शिक्षा के अधिकार की पैरवी करने पर तालिबानी आतंकियों ने मलाला को सिर पर गोली मार दी थी। हालांकि खुदकिस्मती से मलाला बच गईं, जिसके बाद से वे विदेश में रह रही हैं।
बता दें कि मीडिया को दिये साक्षात्कार में मलाला ने कहा कि 2012 और अब के पाकिस्तान में काफी अंतर आ चुका है। लंबे समय से कट्टरपंथियों से लड़ रहा पाकिस्तान में काफी बदलाव आ चुका है। लोग अब सक्रिय हो गये हैं। साथ ही शिक्षा के प्रति जागरुक भी हुए हैं और एकजूट होकर पाकिस्तान को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

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तालिबानी फरमान के खिलाफ अभियान जारी
आपको बता दें कि मलाला यूसुफजई ने 11 साल की उम्र में गुल मकई नाम की अपनी डायरी के जरिये तालिबान के खिलाफ अभियान शुरु किया था। तालिबानी आतंकियों ने लड़कियों को स्कूल न जाने का फरमान सुना दिया था। लेकिन मलाला ने इसकी चिंता किये बगैर लड़कियों को शिक्षा देने के लिए प्रेरित करने का अभियान जारी रखा। बता दें कि पाकिस्तान में तालिबानी आतंकियों ने लड़कियों के शिक्षा के खिलाफ अभियान चलाया है। इसके कारण पिछले कई सालों से स्कूलों को निशाना बना रहे हैं। तालिबानियों का मानना है कि मलाला लड़कियों को शिक्षा देकर पश्चिमी सभ्यता को बढ़ावा दे रही है।
गौरतलब है कि तालिबानी आतंकियों ने अक्टूबर 2012 में स्कूल से लौटते समय मलाला यूसुफजई पर हमला कर दिया। आतंकियों ने मलाला के सिर पर गोली मार दी जिससे वे बुरी तरह घायल हो गईं। बाद में उन्हें इलाज के लिए लंदन ले जाया गया। मलाला तब से लंदन में ही रह रही ही हैं और वहीं से अपनी स्कूली पढ़ाई भी पूरी कर ली हैं।

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शांति के लिए मलाला को मिला नोबेल
आपको बता दें कि मलाला अपने पिता जियाउद्दीन के साथ मिलकर एक चैरिटी संस्था चलाती हैं, जिनका मकसद है दुनिया के हर लड़की के लिए शिक्षा की व्यवस्था करना। मलाला की इस बहादुरी के लिए दुनिया में सम्मान मिला और 2004 में भारत के कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार सेसम्मानित किया गया।