
नई दिल्ली: सीरिया में कथित रासायनिक हथियार हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तीन प्रस्ताव पास नहीं हुए। ये प्रस्ताव हमले की जांच से संबंधित हैं। सुरक्षा परिषद को जांच के अधिकार को लेकर विश्व संगठन में तनातनी का माहौल बना हुआ है। प्रस्ताव में एक साल के लिए नई स्वतंत्र जांच एजेंसी और रासायनिक हथियार के इस्तेमाल के दोषी की पहचान करने की बात कही की गई थी। प्रस्ताव के पक्ष में 12 वोट मिले थे वहीं विपक्ष में दो मत पड़े। इसके अलावा अगले दो प्रस्ताव रूस ने पेश ने किए जिन्हें बहुमत नहीं मिला। रूस के पहले प्रस्ताव में भी स्वतंत्र जां? तंत्र ?? की बात कही गई थी । रूस की ओर से पेश तीसरे प्रस्ताव में ओपीसीडब्ल्यू जांच दल के काम से जुड़ा था। इसके पक्ष में 5 और विपक्ष में 4 वोट मिले। इधर यूएन में अमरीका की राजदूत निक्की हेली ने रूस के वीटो की निंदा की।
अमरीका चाहता है यूएन करे इसपर पहल
सीरिया में रासायनिक हमले के बाद उत्पन्न स्थितियों पर नजर रखने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने लातिन अमरीका के अपने आधिकारिक दौरे को रद्द कर दिया है। अब पेरू में होने वाले समिट ऑफ द अमरीकाज के लिए डोनल्ड ट्रंप की जगह उप राष्ट्रपति माइक पेंस लातिन अमरीका के दौरे पर जाएंगे। ट्रंप के इस निर्णय से इस बात के कयास लगाए जाने लगे हैं कि अमरीका रासायनिक हमले के बदले सीमित हमले की बजाय बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति वॉशिंगटन में रहकर सीरियाई मामले पर नजर रखेंगे। ट्रंप पहले ही बता चुके हैं कि वो इस हमले का जवाब पूरी ताकत से देंगे और उन्होंने सेना के इस्तेमाल से इनकार भी नहीं किया है। दरअसल इस मामले में अमरीका चाहता है कि यूएन अलग से एक पैनल गठित करे जो सीरिया में हुए रासायनिक हमले की जांच कर दोषियों की पहचान करे। वहीं रूस इस प्रस्ताव को वीटो कर सकता है। इस मुद्दे पर ट्रंप ने ब्रितानी पीएम टेरेसा मे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर बात की।
एकतरफा कार्रवाई न करे अमरीका
दूसरी तरफ चीन ने अमरीका की तरफ से संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अमरीका को चेताया है वो एकतरफा कार्रवाई न करे। चीन की यह चेतावनी अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीरिया के गृहयुद्ध में कथित तौर पर रासायनिक हमले का जवाब देने की प्रतिबद्धता जताए जाने के बाद आई है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि उनका देश अकारण बल प्रयोग या धमकी देने के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी व्यापक, तटस्थ और उद्देश्यपूर्ण जांच से पहले किसी भी पक्ष को परिणामों का पूर्वानुमान लगाते हुए किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। शुआंग ने कहा कि सैन्य तरीके से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।
अमरीकी कार्रवाई के होंगे गंभीर परिणाम
वहीं रूस का कहना है कि उसे डूमा में क्लोरीन या अन्य किसी रसायन के इस्तेमाल के संकेत नहीं मिले हैं। रूस ने यूएन को चेतावनी दी है कि अगर अमरीका सैन्य कार्यवाई करता है तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
Published on:
11 Apr 2018 03:59 pm
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