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उत्तर कोरिया पर मेहरबान सिंगापुर, उठाएगा किम जोंग का पूरा खर्च

कोरिया के नेता किम जोंग उन जिस होटल में ठहरे हैं वहां का पूरा खर्च सिंगापुर उठाएगा।
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नई दिल्ली

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Mangala Prasad Yadav

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Updated: 11 Jun 2018, 6:16 PM IST

kim

उत्तर कोरिया पर मेहरबान सिंगापुर, उठाएगा किम जोंग का पूरा खर्च

सिंगापुरः सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के लिए यहां पहुंचे उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और उनके साथ आए लोगों के होटल का बिल सिंगापुर चुकाएगा। बालाकृष्णन ने एक साक्षात्कार में कहा, "यह मेहमाननवाजी है जो हम उनके लिए पेश कर रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या सेंट रेजीस स्थित होटल में ठहरे उत्तर कोरियाई दल के लिए सिंगापुर ने होटल का बिल चुकाया है, उन्होंने कहा, " बेशक, हम चुकाएंगे। उन्होंने हमें मेहमाननवाजी का मौका दिया है।" उन्होंने बताया कि शिखर सम्मेलन पर कुल दो करोड़ डॉलर का खर्च सिंगापुर कर रहा है। प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने इससे पहले कहा कि इस राशि का आधा खर्च सुरक्षा पर किया जाएगा। करीब 50 लाख डॉलर यहां आने वाले 2,500 से अधिक पत्रकारों के दल को सुविधाएं प्रदान करने पर किया जाएगा।

किम जोंग ने जताई थी सिंगापुर आने की इच्छा
इससे पहले उत्तर कोरियाई किम ने कहा था कि वह सम्मेलन के लिए या बिना सम्मेलन के भी सिंगापुर आना पसंद करेंगे।" सिंगापुर के एक अखबार के अनुसार किम जोंग मंगलवार को सुबह नौ बजे सेंतोसा द्वीप स्थित केपेला होटल में शुरू होने वाले शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। दोनों नेताओं के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रयास, शांति और स्थायित्व के मसले पर बातचीत होने की संभावना है।

सोमवार को हुई अंतिम दौर की बातचीत
उत्तर कोरिया और अमरीकी राजनयिकों के बीच भी दोनों देशों के नेताओं के सामने शिखर सम्मेलन के दौरान पेश किए जाने वाले करार-पत्र को को लेकर सोमवार को अंतिम दौर की बातचीत हुई। बैठक में दोनों देशों के बड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था
मंगलवार को किम जोंग और डोनाल्ड ट्रंप की होने वाली मुलाकात को लेकर सिंगापुर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है। किम और ट्रंप के आगमन से पहले होटल में सुरक्षा की जांच के मद्देनजर उनकी टीम यहां आ चुकी थी। टीम में शामिल लोगों ने यहां स्थानीय अधिकारियों से मुलाकात की। किम के 2011 में सत्ता में आने के बाद उनका उत्तर-पूर्व एशिया का पहला दौरा है।