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पाकिस्तान चुनाव: दिल टूटने से चुनाव जीतने तक खुद को कैसे संभाला इमरान खान ने, कुछ ऐसी है कहानी

सियासी कॉम्पीटिशन में पार्टी की हार के बाद इमरान की निजी जिंदगी भी तहस नहस हो गई। 2002 चुनाव नतीजों के बाद ही उनकी पहली पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ उन्हें छोड़कर लंदन वापस चली गईं।

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imran jemima

पाकिस्तान चुनाव: दिल टूटने से चुनाव जीतने तक खुद को कैसे संभाला इमरान खान ने, कुछ ऐसी है कहानी

लाहौर। पाकिस्तान के आम चुनाव में इमरान खान सबसे ताकतवर लीडर उभर कर आये हैं। उनकी पार्टी पीटीआई को जोरदार कामयाबी मिली है। जल्द ही इमरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सकते हैं। वैसे तो इमरान की सफलता के बाद उनके निजी जीवन की नकारात्मक बातों पर भी रोक लग जाएगी, लेकिन एक वक्त ऐसा था जब सियासत की राह में उनका सफर बेहद कठिन था और साथ ही निजी जीवन में उन्हें बहुत सारी दिक्कतों का समाना करना पड़ रहा था।

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कठिन रहा इमरान का राजनीतिक सफर

इमरान खान ने 1996 में अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इन्साफ को खड़ा किया। उसके बाद 1997 से वह पाकिस्तान का आम चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन उन्हें मुंह की खानी पड़ी।साल 2002 तक जनता उन्हें एक पॉलिटिशियन के रूप में नकारती रही। उसके बाद का दौर उनके जीवन में अहम साबित हुआ। 2002 में हुआ पाकिस्तान का आम चुनाव इमरान खान की जिंदगी में निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इन चुनावों में भी इमरान को मुंह की खानी पड़ी थी। हालांकि इस बार इमरान खान अपनी पार्टी को लेकर बेहद संजीदा थे और वे हर हाल में जीतना चाहते थे।

जेमिमा ने तोडा दिल, जनता ने उम्मीदें

सियासी कॉम्पीटिशन में पार्टी की हार के बाद इमरान की निजी जिंदगी भी तहस नहस हो गई। इन चुनाव नतीजों के बाद ही उनकी पहली पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ उन्हें छोड़कर लंदन वापस चली गईं। इसके कुछ ही महीनों के बाद दोनों के बीच तलाक हो गया। जेमिमा से इमरान का निकाह 16 मई 1995 को हुआ था।वह ब्रिटेन के एक अरबपति की बेटी थी।

इमरान उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि चुनाव में व्यस्तता की वजह से वे जेमिमा को कम वक्त दे पाते थे। एक इंटरव्यू में इमरान ने कहा हैं, “मैंने अस्पताल खोला, राजनीतिक पार्टी लांच की, और एक दूसरी संस्कृति की लड़की से शादी की थी। जहां मुझे अपनी पत्नी को ज्यादा वक्त देना था, लेकिन नई पार्टी होने और चुनाव सर पर होने की वजह से ये काफी मुश्किल हो गया।” यहीं से उनकी और उनकी पत्नी के रिश्ते बिगड़ते गए।

जेमिमा को टारगेट करती थीं विरोधी पार्टियां

जेमिमा के गैर पाकिस्तानी होने की वजह से इमरान को बहुत मुश्किल हुई । इमरान ने एक इंटरव्यू में कहा" मैंने सोचा था कि राजनीति के एंट्री के बाद भी जेमिमा के साथ मिलकर काम करेंगे, लेकिन पाकिस्तानी पार्टियों ने मेरी पत्नी पर राजनीतिक हमला किया और उनकी शादी को यूहदी षड़यंत्र का हिस्सा बताया।" धीरे धीरे ऊबकर इमरान ने राजनीतिक कार्यों से अपनी पत्नी को अलग कर दिया। उसके बाद इमरान और जेमिमा के रास्ते अलग होने लगे।

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जेमिमा को वक्त न देना गलती थी

इमरान खुद स्वीकार करते हैं कि जेमिमा से दूरी बना लेना बुनियादी गलती थी। वो कहते हैं " हमारे रिश्ते में दूरी आने लगी, वो हमसे संपर्क नहीं कर पाती थी। उस समय पाकिस्तान में मोबाइल फोन नहीं थे और मैं चुनाव के चलते अक्सर ग्रामीण इलाकों में रहता था।" चुनाव में कामयाबी सुनिश्चित करने के लिए इमरान खान ने पाकिस्तान का लंबा दौरा किया। ऐसी में इमरान अपनी वैवाहिक जिंदगी को ज्यादा वक्त नहीं दे सके। वो कहते हैं, “2002 के चुनाव में हम बुरी तरह से हारे। इसके बाद जेमिमा ने उम्मीदें छोड़ दी थी। उसने सोचा कि मेरा संघर्ष कभी न खत्म होने वाली एक लड़ाई है।"

5 सप्ताह मुल्क के दौरे पर रहने के बाद जब इमरान वापस आये तो जेमिमा का दिल टूट चुका था और उसने इमरान को अपने लंदन जाने का फैसला सुना दिया।