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चीन के राष्ट्रपति ने भारत के जिस पंचशील का लोहा माना, जा​निएं क्या है वह सिद्धांत

तिब्बत और भारत के बीच व्यापार और आपसी संबंधों को लेकर किए गए इस समझौते की प्रस्तावना में पांच सिद्धांत हैं।

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नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच पांच दशक पहले हुआ पंचशील समझौता दोनों देशों के आपसी रिश्तों की बुनियाद है। पंचशील समझौते पर 29 अप्रैल 1954 को भारत-चीन ने हस्ताक्षर किए थे। तिब्बत और भारत के बीच व्यापार और आपसी संबंधों को लेकर किए गए इस समझौते की प्रस्तावना में पांच सिद्धांत थे, जो 60 के दशक की शुरुआत तक भारत की विदेश नीति का हिस्सा भी रहे। इसके बाद ही हिंदी-चीनी भाई-भाई के नारे लगे और भारत ने गुटनिरपेक्षता को अपनी नीति बनाया।

1954 में दोनों देशों के बीच बैठक

पंचशील समझौते को लेकर 31 दिसंबर 1953 और 29 अप्रैल 1954 को दोनों देशों के बीच बैठक हुई। इसके बाद बीजिंग में इस पर हस्ताक्षर हुए। समझौता मुख्य तौर पर भारत और तिब्बत के व्यापारिक संबंधों पर केंद्रित है, लेकिन इसे इसकी प्रस्तावना की वजह से याद किया जाता है। जिसमें पांच सिद्धांत हैं।

बौद्ध धर्म से आया पंचशील शब्द
पंचशील शब्द इतिहास में बौद्ध अभिलेखों में पाया जाता है। यह बौद्ध भिक्षुओं का व्यवहार निर्धारित करने वाले पांच निषेध तत्व हैं। तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने वहीं से यह शब्द लिया था। यह निषेध हैं- 1. हत्या न करना 2. चोरी न करना 3. व्यभिचार न करना 4. असत्य न बोलना 5. मद्दपान न करना

यह हैं पंचशील सिद्धांत
1- सभी देशों की ओर से अन्य देशों की क्षेत्रीय अखंडता और प्रभुसत्ता का सम्मान करना।


2- दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना।


3- दूसरे देश पर आक्रमण न करना।


4- आपसी सहयोग एवं लाभ को बढ़ावा देना।


5- शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की नीति का पालन करना।

यादगार है समझौता

पंचशील समझौते के तहत भारत ने तिब्बत को चीन का एक क्षेत्र कबूल कर लिया था। भारत को 1904 की ऐंग्लो तिबतन संधि के तहत तिब्बत के संबंध में जो अधिकार मिले थे भारत ने वे सारे इस संधि के बाद त्याग दिए, हालांकि बाद में इस समझौते पर सवाल भी उठाए गए। कुछ लोगों ने पूछा कि समझौते के एवज में भारत ने सीमा संबंधी सारे विवाद निपटा क्यों नहीं लिए। भारत और चीन संबंधों की बात होती है तब इस सिद्धांत का जिक्र जरूर होता है। इस संधि को भले ही 1962 में ज़बरदस्त चोट पहुंची हो लेकिन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में इसका अमर दिशानिर्देशक सिद्धांत हमेशा जगमगाता रहेगा।