
वर्ल्ड बैंक ने जारी किया बयान, कहा-सिंधु नदी समझौते पर भारत-पाकिस्तान में नहीं बनी सहमति
नई दिल्ली। सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के बीच कोई हल नहीं निकल पाया है। इस संधि को लेकर पाक की चिंता अभी भी बरकरार है। बता दें कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने विश्व बैंक के सामने भारत की ओर से सिंधु जल संधि के उल्लंघन का मुद्दा उठाया था।
नहीं निलका कोई समाधान
इस मुद्दे पर विश्व बैंक ने कहा कि पाकिस्तान के अनुरोध पर आयोजित हुई इस बैठक में सिंधु जल संधि विवाद का मैत्रीपूर्ण हल निकालने पर चर्चा की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। वार्ता के बाद वर्ल्ड बैंक ने एक बयान जारी किया। इस बयान में विश्व बैंक ने बताया कि बैठक के अंत में कोई समझौता नहीं हो पाया है। लेकिन हम आपसी सहयोग के द्वारा संधि के प्रावधानों के अनुरूप विवाद खत्म करने के लिए दोनों देशों के साथ काम करते रहेंगे।
किशनगंगा परियोजना के उद्घाटन पर चिंता
जारी बयान में विश्व बैंक ने आगे बताया, ‘बैठक में पाकिस्तान की तरफ से किशनगंगा जलविद्युत परियोजना के उद्घाटन को लेकर भी चिंताए जाहिर की गईं। वहीं, पाकिस्तानी दूतावास ने तत्काल इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बता दें कि अटॉर्नी जनरल अश्तर औसाफ अली के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्व बैंक की मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टलीना जॉर्जिया से मुलाकात की थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने किया था उद्घाटन
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर को सौगात देते हुई 330 मेगावॉट क्षमता वाली किशनगंगा विद्युत परियोजना का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर के किश्तवार जिले में 1,000 मेगावॉट की पाकल दुल विद्युत परियोजना की आधारशिला भी रखी थी। वहीं, पाकिस्तान ने यह कहकर इसका विरोध किया था कि इससे उसके यहां पानी की आपूर्ति बाधित होगी।
सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण
ये दोनों परियोजनाएं सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हैं। भारत की इन दोनों योजनाओं को पाकिस्तान के खिलाफ एक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। किश्तवार जिले में बनाए जा रहे 1,000 मेगावाट क्षमता की पाकल दुल पनबिजली परियोजना से राज्य को 12 फीसदी मुफ्त बिजली मिलेगी। इस परियोजना को पूरा होने में 66 महीने लगेंगे।
Published on:
23 May 2018 01:04 pm

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