
किसी भी जातक की जन्म कुंडली में कई तरह के शुभ व अशुभ योग-दोष- का होना एक आम बात है। लेकिन ये भी बात खास है कि ज्योतिष के अनुसार जातक के जीवन में अच्छा व बुरा समय यहीं योग लाते हैं। वहीं बुरे योग कुछ ऐसे भी होते हैं तो जीवन को इतना अधिक प्रभावित करते हैं कि जातक की जिंदगी तबाह तक हो जाती है। इन्हीं बुरे दोष में से एक दोष होता है प्रेत दोष, जिसे ज्योतिष में अत्यंत घातक माना गया है। ज्योतिष के अनुसार इस दोष के फलस्वरूप जातक को स्वास्थ्य समस्याओं सहित विवाह में देरी, कारोबार में असफलता आदि की स्थितियों से लगातार परेशान रहना पड़ता है।
यहां तक की ज्योतिष का मानना है कि ये अशुभ दोष भूत, पूर्वजन्म के पाप या किसी भयानक कार्य के कारण मृत्यु होने से तक जुडता हैं। ऐसे में हर किसी के मन में ये सवाल आना स्वभाविक ही है कि किसी पर ये अशुभ योग है तो उसे कैसे पहचानें, तो इस संबंध में ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि इस अशुभता वाले योग को पहचानने के लिए सामान्यत: कुंडली को देखना होता है, ऐसे में जिस कुंडली के द्वादश भाव में बुध या शनि या राहु-केतु होते हैं, तो उस भाव को देखा जाता है।
इस दोष के सम्भावित इशारों में सबसे उपर पर राहु-केतु माने जाते हैं। यानि अगर राहु-केतु के साथ शनि और बुध भी हैं, तो प्रेत दोष का प्रभाव काफी अधिक हा़े जाता हैं।
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार जिस किसी की कुंडली में यह दोष होता है, उसके लिए मंदिर जाकर पूजा करने के साथ ही दान करना, भगवान शिव के मंत्र का जाप करना, नवग्रह स्तोत्र का पाठ करना, वस्तुओं को दान आदि करना शुभ माना जाता है।
ऐसे समझें प्रेत दोष क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक प्रेत दोष काफी अशुभ माना जाता है, ऐसे में इस दोष से प्रभावित जातक को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। जन्मकुंडली में सूर्य और चंद्रमा के एक साथ ग्रहण के समय यह दोष होता है और इससे जातक के जीवन में कठिनाइयां और संकट आने की संभावना होती हैं। वहीं ये दोष जातक की कुंडली में स्थित भावों पर भी अपना प्रभाव छोड़ता है।
यहां तक की ये दोष कुंडली में भारी होने पर जातक के जीवन पर तक संकट उत्पन्न कर सकता हैं। प्रेत दोष के फलस्वरूप जातक अकेला रहना पसंद करने के चलते दोस्तों और परिवार से तक दूरी बना लेता है, उसे बुरे सपने देखने के साथ ही अनेक तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। इस दोष को शांत करने के लिए मन्त्र जप, दान, यज्ञ, रुद्राभिषेक आदि उपाय विशेष माने गए हैं।
किसी भी जातक की कुंडली में प्रेत दोष कुछ खास कारणों से बनते हैं, इसमें शुभ ग्रहों के दुर्बल होने या कुंडली में कुछ विशेष योगों के बनने अथवा कुंडली में चंद्रमा या राहु की आश्रय स्थानों में बैठे ग्रहों का संयोग होना प्रमुख है। यहां तक की इस दोष को कुंडली में पितृ दोष के नाम से भी संबोधित किया जाता है।
ज्योतिष के अनुासर प्रेत दोष से बचने के अचूक उपाय-
- जातक को ॐ गुरुवे नम: मंत्र का जाप करना चाहिए, मान्यता है कि इसे करने से इस दोष से मुक्ति मिलती है।
- पूर्वजों और वंशजों को याद करते हुए जातक को दान करते रहना चाहिए।
- पूर्वजों का श्राद्ध करने से भी प्रेत दोष से मुक्ति मिलती है।
- विशेष रूप से शनिवार के दिन इस दोष से ग्रसित जातक को मंदिर जरूर जाना चाहिए।
- इस दोष से प्रभावित जातक को रुद्राक्ष धारण करना विशेष माना जाता है, मान्यता ये है कि रुद्राक्ष प्रेत दोष से मुक्ति प्रदान करता है।
- इस दोष से ग्रसित जातक को संतों की सेवा से आध्यात्मिक उन्नति मिलती है और इस दोष से भी मुक्ति प्राप्त होती है।
राशि अनुसार करें ये उपाय
1. मेष राशि- इस दोष के नकारात्मक प्रभावों को हर रोज हनुमान चालीसा का पाठ कर कम करने में मदद मिलती है।
2. वृषभ राशि- नियमित महामृत्युंजय मंत्र का जाप प्रेत दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करता है।
3. मिथुन राशि- माना जाता है कि इस राशि के लोगों द्वारा शिव मंदिर में रुद्राभिषेक से इस दोष का असर कम हो जाता है।
4. कर्क राशि- दोष के अशुभ प्रभाव को हर रोज गायत्री मंत्र का जाप कर कम किया जा सकता है।
5. सिंह राशि- प्रेत दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में हर रोज सुबह सूर्य को जल चढ़ाना सहायक सिद्ध होता है।
6. कन्या राशि- प्रेत दोष के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिउ हर रोज विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
7. तुला राशि- प्रेत दोष की नकारात्मकता कम करने के लिए जरूरतमंद लोगों को काले तिल और सरसों का तेल दान करें।
8. वृश्चिक राशि- प्रेत दोष की नकारात्मकता कम करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने के साथ ही शिव मंदिर में सरसों के तेल का दीया जलाएं।
9. धनु राशि- हर रोज गायत्री मंत्र का जाप करने और पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाने से इसके नकारात्मक प्रभाव कम होते है।
10. मकर राशि- दोष के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए हर रोज हनुमान चालीसा का पाठ करें।
11. कुम्भ राशि- दोष के नकारात्मक प्रभावों में कमी हर रोज शिव स्तोत्र का पाठ करने से इस करने से आ सकती है।
12. मीन राशि- प्रेत दोष के बुरे प्रभाव में कमी लाने के लिए हर दिन भगवान शिव को दूध, जल चढ़ाने के साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना चाहिए।
Published on:
17 Jul 2023 03:16 pm
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