
जानिए, कोरोना को लेकर ज्योतिषीय गणनाओं का सच, मिलेगा इस महामारी से छुटकारा
कोरोना ने पूरी दुनिया को अपनी जकड़ में ले रखा है। दिसंबर 2019 से शुरू हुए इस प्रकोप का आखिर अंत कब होगा? इसको लेकर ज्योतिषी अलग-अलग मत रखते हैं। इससे पहले जानिए कि कोरोना की उत्पत्ति को लेकर की गई भविष्यवाणी कितीन सटीक हैं। ज्योतिषाचार्यों का पहला मत ये था कि 26 दिसंबर 2019 को धनु राशि में एक सप्तग्रह योग बना और एक बड़ा सूर्य ग्रहण लगा, कोरोना उसके बाद हुआ। दूसरा मत यह था कि 24 जनवरी 2020 को जैसे ही शनि ने धनु राशि को छोडकऱ 30 वर्ष बाद मकर राशि में प्रवेश किया, तब कोरोना शुरू हुआ। तीसरा मत यह रहा कि 12 फरवरी 2020 को केतु जैसे ही मूल नक्षत्र में आए और राहु ने आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेश किया, तब इसकी शुरुआत हुई। अब यह सोचने का विषय है कि क्या हर 30 वर्ष में जब शनि ग्रह, मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो कोरोना जैसी महामारी होती है? या हर साढ़े अठारह वर्ष में राहु और केतु आद्र्रा तथा मूल नक्षत्र में आते हैं तो भी ऐसी स्थितियां देखी नहीं गई हैं। और सप्तग्रह योग भी 6-7 वर्ष में एक बार बन ही जाता है।
कोरोना के जाने पर हैं मत-मतांतर
कोरोना कब जाएगा, इसके भी ज्योतिषीय मत दिए गए हैं। सबसे पहला मत यह था कि जैसे ही 14 अप्रेल 2020 को सूर्य, मेष राशि में खासकर अश्विनी नक्षत्र में आएंगे, कोरोना खत्म हो जाएगा। कुछ ज्योतिषीय मत ऐसे थे कि जब अगस्त 2020 में जब 6 ग्रह या तो अपनी राशि में होंगे या अपने मित्र की राशि में होंगे या अपनी उच्च की राशि में होंगे, उस समय कोरोना खत्म हो जाएगा। बहुत से लोगों ने यह भी कहा कि 23 सितंबर 2020 को जैसे ही केतु मूल नक्षत्र को छोड़ेंगे कोरोना खत्म हो जाएगा। हालांकि ये अवधि जा चुकी है, लेकिन मंडेन ज्योतिष पद्धति के मुताबिक जनवरी 2023 तक इस महामारी का कम या अधिक असर रहेगा।
Updated on:
17 May 2021 01:00 pm
Published on:
17 May 2021 11:22 am
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