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Krishi Yojana 2026: पहली बार शाक-भाजी खेती पर अनुदान, मुख्यमंत्री औद्यानिक मिशन से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

Kisan News: बाराबंकी में मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास मिशन योजना के तहत पहली बार शाक-भाजी की खेती करने वाले किसानों को अनुदान मिलेगा। योजना के अंतर्गत हाइब्रिड सब्जियों की खेती पर प्रति हेक्टेयर 24 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। पात्र किसानों का चयन प्रथम आवक, प्रथम पावक के आधार पर किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास मिशन से सब्जी उत्पादकों को नई उम्मीद, प्रथम आवक प्रथम पावक के आधार पर मिलेगा लाभ    (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group) 

मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास मिशन से सब्जी उत्पादकों को नई उम्मीद, प्रथम आवक प्रथम पावक के आधार पर मिलेगा लाभ    (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group) 

Krishi Yojana: किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को विविधता की ओर ले जाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास मिशन योजना के तहत पहली बार जनपद बाराबंकी में शाक-भाजी (सब्जी) की खेती करने वाले किसानों को अनुदान देने की शुरुआत की जा रही है। इस योजना से विशेष रूप से छोटे और मध्यम किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो अब तक पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे।

सब्जी उत्पादन को मिलेगा प्रोत्साहन

अब तक अनुदान योजनाओं का लाभ मुख्य रूप से फलोत्पादन, बागवानी या कुछ चयनित फसलों तक सीमित था। लेकिन इस बार सरकार ने सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शाक-भाजी को भी इस योजना में शामिल किया है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर सब्जियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

जिला उद्यान विभाग ने साझा की जानकारी

जिला उद्यान अधिकारी प्रज्ञा उपाध्याय ने बताया कि यह योजना पहली बार लागू की जा रही है और इसके लिए जनपद स्तर पर लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि शाक-भाजी उत्पादन के लिए किसानों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ बीज और कैरेट (क्रेट) भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उत्पादन और विपणन दोनों में सुविधा होगी।

कितना है लक्ष्य और किसे मिलेगा लाभ

जिला उद्यान अधिकारी के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत शंकर (हाइब्रिड) शाक-भाजी फसलों के लिए कुल 50 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया है। 40 हेक्टेयर क्षेत्र सामान्य वर्ग के किसानों के लिए,10 हेक्टेयर क्षेत्र अनुसूचित जाति के किसानों के लिए आरक्षित किया गया है इस वर्गीकरण से यह सुनिश्चित किया गया है कि सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के किसानों को भी योजना का समुचित लाभ मिल सके।

किन फसलों पर मिलेगा अनुदान

इस योजना के तहत कई प्रमुख शाक-भाजी फसलों को शामिल किया गया है, जिनमें लौकी,तोरई,करेला अन्य मौसमी सब्जियां शामिल हैं। ये फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं और बाजार में इनकी मांग भी बनी रहती है, जिससे किसानों को शीघ्र आय प्राप्त हो सकती है।

प्रति हेक्टेयर मिलेगा 24 हजार रुपये अनुदान

योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को 24,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिया जाएगा। यह अनुदान किसानों को खेती की प्रारंभिक लागत-जैसे बीज, खाद, पौध संरक्षण और अन्य आवश्यक संसाधनों में मदद करेगा। इसके साथ ही बीज और कैरेट उपलब्ध कराए जाने से किसानों का खर्च और भी कम होगा।

प्रथम आवक, प्रथम पावक के आधार पर चयन

जिला उद्यान विभाग ने स्पष्ट किया है कि पात्र किसानों का चयन प्रथम आवक, प्रथम पावक (पहले आओ, पहले पाओ) के आधार पर किया जाएगा। इसलिए इच्छुक किसानों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते आवेदन करें, ताकि योजना का लाभ मिल सके।

कैसे करें आवेदन

हालांकि आवेदन प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार किसानों को अपनी भूमि के कागजात,पहचान पत्र,बैंक खाता विवरण,जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) जैसे दस्तावेज तैयार रखने की सलाह दी गई है। आवेदन जिला उद्यान विभाग के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।

किसानों में दिखा उत्साह

योजना की जानकारी मिलते ही जनपद के किसानों में उत्साह देखने को मिल रहा है। कई किसानों का कहना है कि सब्जी की खेती से उन्हें पहले भी अच्छा मुनाफा हुआ है, लेकिन लागत अधिक होने के कारण वे बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं कर पा रहे थे। अब अनुदान मिलने से वे सब्जी उत्पादन को व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ा सकेंगे।

आय दोगुनी करने की दिशा में कदम

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सब्जी उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है। कम समय में तैयार होने वाली ये फसलें साल में कई बार ली जा सकती हैं। सरकार की यह योजना किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।

स्थानीय बाजार को भी मिलेगा लाभ

इस योजना से न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय बाजारों में ताजी सब्जियों की उपलब्धता भी बढ़ेगी। इससे उपभोक्ताओं को भी उचित दाम पर सब्जियां मिल सकेगी और बाहरी जनपदों पर निर्भरता कम होगी। जिला उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि यह योजना सफल रहती है तो आने वाले समय में इसके दायरे को और बढ़ाया जा सकता है। अधिक फसलों और अधिक क्षेत्र को इसमें शामिल करने पर भी विचार किया जा सकता है।