
Pushya Nakshatra 2026-पुष्य नक्षत्र में 'महिषी' पर सवार होकर आएगी वर्षा (फोटो सोर्स- Patrika)
Pushya Nakshatra 2026: पिछले एक पखवाड़े से बारिश पर ब्रेक लगा हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में वर्षा में बढ़ोतरी हो सकती है। सोमवार को पुनर्वसु नक्षत्र से बारिश का प्रवेश तीसरे नक्षत्र पुष्य में हो गया है। इसका वाहन 'महीषी' (भैंस) होगा, जिसे ज्योतिष शास्त्र में अच्छी और संतोषजनक बरसात का सूचक माना जाता है। इसके प्रभाव से आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा के योग बनने की संभावना साथ ही खंडवृष्टि के योग भी ज्योतिषी जता रहे हैं।
पं. रामनारायण आचार्य ने बताया कि तीसरे नक्षत्र पुष्य में 20 जुलाई से स्थितियां अनुकूल होने लगेंगी और बारिश का सिलसिला शुरू होने के संकेत ग्रह दे रहे हैं। इस बार रोहिणी का वास समुद्र तट और समय का वास वैश्य के घर पर है, इसलिए सामान्य वर्षा के योग वर्षाकाल में रहेंगे। साथ ही अच्छी बात यह है कि इस बार गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान है, इसलिए वर्षा भले ही सामान्य हो, लेकिन फसलों के हिसाब से अच्छी होगी, साथ ही फसलों की पैदावार अच्छी होगी।
ज्योतिष मठ संस्थान के पं. विनोद गौतम के अनुसार वैदिक परंपरा के अनुसार, 22 जून को सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही वर्षाकाल की शुरुआत मानी जाती है। पूरे वर्षाकाल में बारिश के कुल आठ नक्षत्र होते हैं. जिनमें से प्रत्येक नक्षत्र में 15 दिन बारिश का चक्र चलता है। इस तरह पूरा वर्षाकाल चार माह का होता है । अब तक राहु और केतु की दृष्टि के कारण बारिश की रफ्तार कमजोर थी और बारिश में बिखराव देखने को मिल रहा है। 18 जुलाई से राहु केतु का बंधक योग समाप्त हो गया है। पुष्य नक्षत्र का वर्षा वाहन महीषी और स्वामी मंगल होगा। आने वाले दिनों में बारिश का प्रभाव बढ़ेगा, लेकिन स्त्री-स्त्री कारक योग होने से खंडवृष्टि के योग बनेंगे। किसी स्थान पर अधिक वर्षा से हानि एवं कहीं कम वर्षा देखी जा सकेगी अर्थात विचित्र बरसात होगी।
पुष्य - 20 जुलाई से 2 अगस्त - महीषी
अश्लेषा - 3 अगस्त 16 अगस्त - अश्व
मघा -17 से 30 अगस्त - चातक
पूर्वा - 31 अगस्त से 12 सिंतबर - खर
उत्तरा - 13 से 26 सितंबर - मांडुक
हस्त - 27 सिंत से 10 अक्टूबर- मूसक
Updated on:
21 Jul 2026 10:33 am
Published on:
21 Jul 2026 10:33 am
