कौरवों द्वारा अन्याय की अनेक घटनाओं को अंजाम देने के बावजूद कृष्ण उनसे उतने क्रोधित नहीं थे, जितने वे द्रोणाचार्य व भीष्म से थे। कृष्ण स्वयं महाकाल हैं। इसलिए समय पर उनका पूर्ण नियंत्रण है। कुरुक्षेत्र में भी उन्होंने कालचक्र को कुछ देर के लिए विराम देकर द्रोणाचार्य एवं भीष्म को यह बताया था कि अगर वे चाहते तो युद्ध नहीं होता, असंख्य लोग मृत्यु का ग्रास नहीं बनते।