श्रावण / सावन 2021 का पहला सोमवार : ऐसे करें भगवान शिवजी की आराधना, मिलेगा मनोवांछित फल

जानें कौन से फूल भ्रगवान शंकर को चढ़ाएं , पढ़ें ये खास बातें...

इस साल यानि 2021 में श्रावण मास 09 अगस्त (दक्षिण भारत पंचांग के आधार पर) से शुरु हो रहा है। मान्यता के अनुसार सावन (श्रावण) माह में भगवान शिवजी की आराधना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है, लेकिन कोई भी देव आराधना अथवा मंत्र, स्तोत्र और स्तुतियां का फल तभी प्राप्त होता है जब आराधना विधि-विधान और शास्त्र सम्मत तरीकों से की जाए। इस बार 2021 में श्रावण मास का पहला सोमवार 09 अगस्त को आ रहा है।

सावन के महीने का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। क्योंकि श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष विधान है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह महीना वर्ष का पांचवां माह है और अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सावन का महीना जुलाई-अगस्त में आता है। इस दौरान सावन सोमवार व्रत का सर्वाधिक महत्व बताया जाता है। दरअसल श्रावस मास भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। इस माह में सोमवार का व्रत और सावन स्नान की परंपरा है।

श्रावण मास में बेल पत्र से भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और उन्हें जल चढ़ाना अति फलदायी माना गया है। शिव पुराण के अनुसार जो कोई व्यक्ति इस माह में सोमवार का व्रत करता है भगवान शिव उसकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु ज्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए हरिद्वार, देवघर, उज्जैन, नासिक समेत भारत के कई धार्मिक स्थलों पर जाते हैं।

सावन के सोमवार 2021...

सोमवार, 09 अगस्त सावन सोमवार व्रत (श्रावण मास का पहला दिन)
सोमवार, 16 अगस्त सावन सोमवार व्रत
सोमवार, 23 अगस्त सावन सोमवार व्रत
सोमवार, 30 अगस्त सावन सोमवार व्रत
सोमवार, 06 सितंबर सावन सोमवार व्रत

सावन माह जहां पश्चिमी, मध्य व कुछ उत्तर भारत के राज्यों में जुलाई 25, 2021, रविवार से शुरु होकर अगस्त 22, 2021, रविवार के दिन तक मान्य रहेगा। वहीं आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु के लिए सावन सोमवार व्रत अगस्त 9, 2021, सोमवार से शुरु होकर सितम्बर 7, 2021, मंगलवार तक मान्य रहेगा। जबकि उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश के कुछ भागों के लिए सावन सोमवार व्रत जुलाई 16, 2021, शुक्रवार से शुरु होकर अगस्त 16, 2021, सोमवार तक मान्य रहेगा। यह अंतर कलेंडर में अंतर (सूर्य पर आधारित व चंद्र पर आधारित) के कारण रहेगा।

शास्त्रों के अनुसार सोमवार शिव उपासना के लिए सबसे उत्तम हैं। लेकिन इस दौरान कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें जैसे -

1. शिवजी की आराधना सुबह के समय पूर्व दिशा की ओर मुंह करके करना चाहिए।

2. संध्या समय शिव साधना करते वक्त पश्चिम दिशा की ओर मुंह रखें।

3. अगर शिव उपासक रात्रि में शिव आराधना करता है तो उसके लिए उत्तर दिशा की ओर मुंह रखें।

4. शिव उपासना के विशेष दिन सोमवार को बहुत ही शुभ फल मिलता है।

5. सुबह स्नान के बाद भगवान शंकर के साथ माता पार्वती और नंदी को गंगाजल या पवित्र जल चढ़ाएं।

6 धतूरे के फूल शिव को अर्पित करने से संतान प्राप्ति होती है।

7.एक लाख दूब अर्पण करने से लंबी आयु होती है।

8. बिल्व पत्र से इच्छित वस्तु की प्राप्ति होती है।

9. जपाकुसुम से शत्रु का नाश होता है।

10.बेला से सुयोग्य जीवनसाथी मिलता है।

11. हरसिंगार से यश, सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

12. दुपहरिया के फूल से स्वर्ण आभूषणों की प्राप्ति होती है।

13. लाल गुलाब से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

14.-चंपा और केवड़ा के पुष्प शिव पूजन में निषेध है।

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दीपेश तिवारी
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