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सूर्य उत्तरायण: सनातन धर्म में मकर संक्रांति के त्योहार का बहुत ही खास महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इसके बाद से ही सारे शुभ कार्य शुरू होने लगते हैं। मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य उत्तरायण होने लगते हैं। सूर्य की दो दिशाओं के बारे में शास्त्रों में बताया गया है। सूर्य एक समय पर दक्षिणायन और दूसरे समय पर उत्तरायण होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उत्तरायण के समय में सूर्य का झुकाव उत्तर की तरफ ज्यादा होता है। आज हम बात करेंगे कि मकर संक्रांति के दिन से उत्तरायण शुरू होता है या 22 दिसंबर से शुरू होता है। आइए जानते हैं पूरा सच राघवेंद्राचार्य जी महाराज से ।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य ग्रह मकर राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इसी दिन से सारे शुभ काम की शुरुआत हो जाती है। स्नान और दान का कार्य भी शुरू होता है। वैज्ञानिक तौर पर देखा जाए तो 22 दिसंबर से दिन बड़े होना शुरू हो जाते हैं और 22 जून से दिन छोटे होना शुरू हो जाता है। राघवेंद्राचार्य जी ने कहा की शास्त्रों में भी सूर्य उत्तरायण 22 दिसंबर से ही हो जाता है। ऐसे में दिसंबर से ही सूर्य उत्तरायण हो चुका है। 14 जनवरी के दिन से मांगलिक काम शुरू हो जाते हैं। जैसे गृह प्रवेश, विवाह, मुंडन। दिसंबर के महीने में मलमास होता है, इसलिए दिसंबर के दिन से मांगलिक काम शुरू नहीं होते हैं।
शुभ काम करने के लिए शुभ तिथि होना अच्छा होता है। मलमास के समय में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किये जाते हैं, लेकिन पूजा- पाठ जरूर किये जाते हैं। मलमास के समय में विष्णु जी की पूजा की जाती है। सूर्य की प्रधानता मकर संक्रांति से बड़ जाता है। दिन बढ़ते हैं इस कारण ये शुभ समय माना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार 22 दिसंबर से ही उत्तरायण से हो जाता है। वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही रूप में 22 दिसंबर से दिन बड़े होने लगते हैं। जब से सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में परिवर्तन होता है। उसी समय से सूर्य उत्तरायण और दक्षिणायन होते हैं। सूर्य के उत्तरायण होने का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही महत्व बहुत ज्यादा है।
Published on:
06 Jan 2026 02:00 pm
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