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Puja Muhurta 2022: बहीखाते की पूजा व्यापारी कब करें? जानें पूजा मुहूर्त और घर-दुकान के लिए चौघड़ियां

Bahikhata Puja Muhurta of Diwali 2022: दिवाली के दिन बही खाता पूजन की सही विधि जानें...

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Deepesh Tiwari

Oct 17, 2022

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Bahi-khata Puja Muhurta 2022: हिंदू धर्म में दीपावली का पर्व अति विशेष माना जाता है। जहां एक ओर धन धान्य की देवी मां लक्ष्मी की इस पर्व में पूजा की जाती है। वहीं व्यापारियों द्वारा इस दौरान पूरे साल के आय व्यय के ब्योरे वाले बहीखाते का पूजन भी किया जाता है।

दरअसल इस साल दिवाली का पर्व 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस बार की दिवाली और नरक चतुर्दशी का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा, क्योंकि मंगलवार, 25 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से सूर्य ग्रहण का सूतक लग जाएगा, ऐसे में दीपावली पूजन में इस बार मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना होगा।

दिवाली के दिन व्यापारियों के लिए बहीखाते का भी विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन बही-खाता के पूजन से माता लक्ष्मी की कृपा पूरे साल भर बनी रहती है। चलिए जानते हैं दिवाली के दिन बही खाता पूजन की सही विधि-

: इस दिन बही-खातों का पूजन करने के लिए शुभ मुहूर्त में नए खाता पुस्तकों पर केसर और चंदन मिलकर लाल कुमकुम से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं।
: इसके उपरांत इन बही-खाताऔर पुस्तकों के ऊपर 'श्री गणेशाय नम:' अवश्य लिखें।
: इसके बाद एक नई थैली लेकर उसमें हल्दी की पांच गांठे, कमलगट्टा, अक्षत, दूर्वा, धनिया और दक्षिणा रखकर, थैली में भी स्वास्तिक का चिह्न लगाकर सरस्वती मां का स्मरण करें।
: इसके बाद माता सरस्वती का ध्यान करें।
: अब बही खातों का गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन करें।

: जिस स्थान पर नवग्रह यंत्र बनाया गया है वहां दक्षिणा, सोना या चांदी का सिक्का, लक्ष्मी जी की मूर्ति या मिट्टी के बने हुए लक्ष्मी-गणेश-सरस्वती जी की मूर्तियां सजाएं।
: यदि आपके पास कोई धातु की मूर्ति है तो उसे साक्षात रूप मानकर दूध, दही ओर गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत, चंदन का श्रृंगार करके फूल आदि से सजाएं।
: इसके साथ ही दाहिने ओर एक पंचमुखी दीपक अवश्य जलाएं, जिसमें घी या तिल का तेल प्रयोग किया जाता है।

साल 2022 के लिए मुहूर्त: Diwali Puja Muhurta

- व्यापारियों के लिए पूजन मुहूर्त - संध्या 4:33 से 7:30 तक है

- घरों में पूजन मुहूर्त रात्रि - 10:30 से 12 बजे तक ही होगा

चौघड़ियां के अनुसार घर एवं दुकान के लिए पूजा मुहूर्त-

: अमृत योग – 4:30 से 6 बजे संध्या तक

: चर योग - 6 से 7:30 बजे संध्या तक

: लाभ योग - 10:30 से 12 बजे रात्रि तक

: शुभ योग - 01:30 से रात्रि 3 बजे तक

: अमृत योग 03 बजे रात्रि से 4:30 प्रातः तक

चौघडियां के अनुसार भी पूजन शुभ ही माना जाता है।

अमावस्या तिथि यानि दिवाली का दिन-

: 24 अक्टूबर, संध्या 4:33 से प्रातः 4:30 तक ही मान्य होगी

: 25 को सूर्य ग्रहण के सूतक, मध्य और मोक्ष काल

: सूर्य ग्रहण सूतक काल: 4:33 प्रातः से

: सूर्य ग्रहण आरम्भ काल: 4:23 संध्या से

: सूर्य ग्रहण का मध्य काल: 5:28 पर होगा

: सूर्य ग्रहण मोक्ष काल: 6:25 बजे मोक्ष हो जाएगा।

यहां जानें कब से कब तक कौन सी तिथि-

: चतुर्दशी तिथि - 24 अक्टूबर, शाम 4:44 बजे तक