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Importance of fast or fasting: कौन सा व्रत है सबसे जरूरी? जानें फायदे और नियम

एकादशी व्रत सही नियम, श्रद्धा और संयम से किया जाए तो यह स्वास्थ्य, धन, मानसिक शांति और भक्ति—चारों का मार्ग खोल सकता है। यह केवल उपवास नहीं, बल्कि मन और जीवन को संतुलित करने का शक्तिशाली साधन है।

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fasting rules (pc: gemini generated)

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जीवन में आगे बढ़ने, मनोकामनाओं की पूर्ति और मानसिक-शारीरिक शांति के लिए व्रत-उपवास की परंपरा भारत में सदियों से चली आ रही है। व्रत केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि शरीर और मन को संतुलित रखने का एक वैज्ञानिक तरीका भी है। लेकिन सवाल यह है कि सबसे बड़ा व्रत कौन-सा है, जिसका सही विधि से पालन करने पर जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो सकती हैं? ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार इसका उत्तर है, एकादशी व्रत।

सबसे बड़ा व्रत कौन-सा? Which Is the Most Powerful Fast?

नवरात्रि, पूर्णिमा, अमावस्या और एकादशी—ये सभी महत्वपूर्ण व्रत हैं, लेकिन एकादशी व्रत को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इसका मुख्य कारण चंद्रमा की स्थिति है। एकादशी तिथि पर चंद्रमा एक टर्निंग पॉइंट पर होता है, जिससे मन और शरीर दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सही नियमों से एकादशी व्रत रखने पर मानसिक तनाव, नकारात्मकता और ग्रहों के अशुभ प्रभाव काफी हद तक कम हो जाते हैं।

व्रत और उपवास का महत्व Importance of Fasting (Vrat & Upvas)

वैज्ञानिक दृष्टि से व्रत शरीर को डिटॉक्स करता है और पाचन तंत्र को आराम देता है।

आध्यात्मिक रूप से व्रत मन, इंद्रियों और विचारों पर नियंत्रण सिखाता है।

विशेष तिथियों पर व्रत रखने से मन की शुद्धि, शरीर की ऊर्जा और इच्छाओं की पूर्ति संभव होती है।

एकादशी व्रत के नियम Ekadashi Vrat Rules & Precautions

एकादशी व्रत दो प्रकार से रखा जाता है—

निर्जल व्रत: इसमें जल भी नहीं लिया जाता। यह केवल पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति ही करें।

फलाहारी/जलीय व्रत: इसमें जल, नींबू पानी, दूध, जूस या फल लिए जा सकते हैं।

डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, पेट की बीमारी या कमजोरी होने पर निर्जल व्रत न करें।

व्रत में अनाज, कुट्टू की पूरी, आलू, समक के चावल जैसे भारी भोजन से बचें। ये उपवास की पवित्रता को कम करते हैं।

मनोकामना के अनुसार एकादशी व्रत Ekadashi Fast for Different Wishes

स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए

महीने की दोनों एकादशी पर जलीय व्रत रखें। दिन-रात भगवान शिव की उपासना करें, कम बोलें और क्रोध से बचें। छह महीने में सकारात्मक बदलाव दिखेगा।

धन और समृद्धि के लिए

फल और जलीय आहार के साथ व्रत रखें। श्रीहरि विष्णु की पूजा करें। विष्णु सहस्रनाम या गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें।

भक्ति और आत्मिक उन्नति के लिए

केवल लिक्विड आहार लें। एकांत में ध्यान करें और अपने प्रिय ईश्वर नाम कृष्ण, हरि, शिव या राम का जप करें।