
घर की किस्मत बिगाड़ देते हैं ये चीजें (pc: gemini generated)
कई बार लोगों के जीवन में सब कुछ सामान्य होता है, फिर भी घर के भीतर एक अनकही बेचैनी बनी रहती है। बिना वजह तनाव, छोटी-छोटी बातों पर झगड़े और बनते हुए कामों का बिगड़ जाना आम समस्या बन जाती है। ज्योतिष और भारतीय परंपरा के अनुसार, घर की शुभता या अशुभता केवल वास्तु दोष का परिणाम नहीं होती, बल्कि यह हमारे कर्म, व्यवहार और रोजमर्रा की दिनचर्या से भी सीधे तौर पर जुड़ी होती है। इन्हीं कारणों से घर में सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है।
ज्योतिष मानता है कि इंसान के हर कर्म से एक विशेष प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न होती है। जब व्यक्ति के कर्म अच्छे होते हैं, सोच सकारात्मक रहती है और व्यवहार संतुलित होता है, तब घर में सकारात्मक तरंगे बनती हैं, जो सुख, शांति और उन्नति को बढ़ाती हैं। इसके विपरीत, जब अशुभ कर्म बढ़ने लगते हैं और नकारात्मक आदतें हावी हो जाती हैं, तो वही ऊर्जा धीरे-धीरे घर में जमा होकर अशुभता का कारण बनती है। गंदगी, अव्यवस्था और अनुचित व्यवहार जैसी छोटी-छोटी बातें मिलकर घर के वातावरण को भारी और अशांत बना देती हैं।
घर में अशुभता आने का एक बड़ा कारण हमारी गलत दिनचर्या और लापरवाह आदतें होती हैं। बाहर पहने गए गंदे जूते-चप्पल जब बिना उतारे घर में पहने जाते हैं, तो उनके साथ बाहर की नकारात्मकता भी घर के भीतर प्रवेश कर जाती है। इसी तरह, लंबे समय तक गंदे कपड़ों को जमा करके रखना, बाथरूम में गंदगी और दुर्गंध बनाए रखना, तथा बेवजह पानी की बर्बादी करना भी घर की ऊर्जा को प्रभावित करता है। जब किताबें, कागज और जरूरी सामान बिखरे रहते हैं, तो मन भी अस्थिर रहता है। इसके अलावा, घर में पूजा स्थल का न होना या पूजा-पाठ का पूरी तरह अभाव होना, लगातार झगड़े, शराब और मांसाहार का अधिक सेवन, ये सभी कारण घर की पवित्रता को कम कर देते हैं।
भोजन केवल शरीर का पोषण नहीं करता, बल्कि घर की ऊर्जा से भी जुड़ा होता है। जब व्यक्ति इधर-उधर घूमते हुए खाना खाता है, भोजन की मर्यादा टूटती है। वेज और नॉनवेज भोजन के लिए एक ही बर्तन का प्रयोग करना, जूठे बर्तन इधर-उधर छोड़ देना और खाने की बर्बादी करना भी नकारात्मकता को बढ़ाता है। भारतीय संस्कृति में अन्न को देवता माना गया है, इसलिए अन्न के प्रति लापरवाही घर में अशुभता का कारण बनती है।
घर का माहौल सबसे ज्यादा इंसान के व्यवहार से प्रभावित होता है। जब घर में तेज आवाज में बात की जाती है, चीखना-चिल्लाना सामान्य हो जाता है, तो शांति अपने आप खत्म हो जाती है। बड़ों का अपमान, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और बच्चों पर गुस्सा या तनाव निकालना घर की सकारात्मक ऊर्जा को कमजोर कर देता है। ऐसा वातावरण धीरे-धीरे पूरे परिवार के मानसिक संतुलन को भी प्रभावित करता है।
अगर घर में फिर से शांति और सकारात्मकता लानी है, तो इसके लिए नियमित और सच्चे प्रयास जरूरी हैं। सुबह और शाम केवल पाँच मिनट पूजा और प्रार्थना करने से भी वातावरण में बड़ा बदलाव आ सकता है। घर में साफ-सफाई बनाए रखना, पानी की बर्बादी रोकना और आपस में प्रेम और शांति से बातचीत करना बहुत आवश्यक है। सप्ताह में एक दिन पूरे परिवार के साथ सुंदरकांड का पाठ या छोटा सा हवन करने से सामूहिक सकारात्मक ऊर्जा बनती है। शनिवार के दिन मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का दीपक जलाना और ड्राइंग रूम में सफेद गाय या सफेद हाथी की मूर्ति रखना भी शुभता बढ़ाने वाले उपाय माने गए हैं।
Published on:
06 Jan 2026 03:38 pm
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