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Chaitra Navratri 2021: नवरात्रि में क्यों नहीं खाया जाता लहसुन और प्याज, खाने से क्या होते हैं दोष

नवरात्रि में उपवास रखें या नहीं, मगर लहसुन और प्याज के सेवन को अशुभ माना गया है। माना जाता है कि इन्हें खाने से तामसिक गुणों में वृद्धि होती है, इसके अलावा भी कई और बुरे प्रभाव पड़ते हैं।  

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नई दिल्ली।

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2021) यानी वासंतिक नवरात्र 13 अप्रैल यानी मंगलवार से शुरू हो चुका है। आज नवरात्र का दूसरा दिन है। 9 दिनों तक चलने वाले इस नवरात्र पर्व का समापन 21 अप्रैल को होगा। इस दौरान बहुत से भक्त 9 दिनों तक उपवास रखते हुए रोज मां के अलग-अलग स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक विधि-विधान से पूजा करते हैं।

नवरात्रि के उपवास के दौरान भक्तों को कई नियमों का पालन करना होता है। नवरात्रि के दौरान भोजन को लेकर भी ऐसा ही एक नियम है नवरात्रि के दौरान उपवास करने वाले भक्त और जो उपवास नहीं करते मां के वे भक्त भी भोजन में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं करते। ... तो आइए जानते हैं क्या वजह है कि नवरात्रि में लहसुन-प्याज का सेवन नहीं किया जाता है।

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इन्हें खाना शुभ नहीं माना जाता
नवरात्रि के दौरान उपवास मन की शुद्धि और आध्यात्मिक विकास के लिए प्रमुख माना गया है, इसलिए इन नौ दिनों में लहसुन और प्याज का सेवन वर्जित होता है, क्योंकि यह तामसिक प्रकृति का भोजन पदार्थ है। इसके सेवन से अज्ञानता और वासना में बढ़ोतरी होती है। साथ ही, मान्यता यह भी है कि लहसुन और प्याज जमीन के नीचे उगते हैं और इनकी सफाई में कई सूक्ष्मजीवों की मृत्यु हो जाती है, ऐसे में इन्हें उपवास या शुभ कार्य के दौरान खाना शुभ नहीं माना गया है।

चंचल होता है मन!
यही नहीं, तामसिक गुणों की वजह से ही अगर लहसुन और प्याज का सेवन करें, तो मन चंचल होता है। उपवास के दौरान मन की चंचलता व्यक्ति को विचलित करती है। इससे भोग और विलास की तरफ मन आकर्षित होता है। साथ ही, भक्त उपवास के नियम का उल्लंघन भी कर सकता है, इसलिए मन और शरीर की पवित्रता को बनाए रखने के लिए लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए।

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पौराणिक कथा भी प्रचलित
लहसुन और प्याज को लेकर एक पौराणिक कथा भी है। इसके मुताबिक, स्वरभानु नाम का दैत्य था, जिसने समुद्र मंथन के बाद देवताओं के बीच बैठकर छल से अमृत पी लिया था। यह बात जब मोहिनी रूप धारण किए भगवान विष्णु को पता चली, तो उन्होंने अपने चक्र से स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर दिया। स्वरभानु के सिर और धड़ को ही राहु तथा केतु कहा जाता है। सिर कटने के बाद स्वरभानु के सिर और धड़ से अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिरीं, जिनसे लहसुन और प्याज की उत्पत्ति हुई। चूंकि, लहसुन और प्याज की उत्पत्ति अमृत की बूंदों से हुई है, इसलिए रोगों को दूर करने में यह दोनों ही कारगर साबित होते हैं, मगर यह राक्षस के मुंह से होते हुए उत्पन्न हुई, इसलिए इसे अपवित्र माना गया है। यही वजह है कि भगवना को इनका भोग नहीं लगाया जाता है।