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रोजगार न मिलने से परेशान किसान, न्याय न मिलने पर कर सकते हैं अनशन

गरीब मजदूरों की मजबूरी शायद ही ऐसी कोई संस्था हो जो ध्यान में रख कर कार्य करती हो

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रोजगार न मिलने से परेशान किसान, न्याय न मिलने पर कर सकते हैं अनशन

औरैया. गरीब मजदूरों की मजबूरी शायद ही ऐसी कोई संस्था हो जो ध्यान में रख कर कार्य करती हो। हर कंपनी हर मालिकान की संस्थाओं को ऊंचाई तक ले जाने में गरीब मज़दूरों की भूमिका भी अहम होती है। मामला औरैया के दिबियापुर स्थित गैल ऑथारिटी ऑफ इंडिया का है। यहां भू विस्थापित मज़दूरों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र के माध्यम से जानकारी दी है कि गैल व पाता में कार्यरत दर्जनों भू विस्थापित भूमि हीन मज़दूर निकाल दिए गए हैं। अब वह भुखमरी की कगार पर जा पहुंचे हैं। अब वह 60 वर्ष के हो चुके हैं इसलिए उन्हें कार्यमुक्त किया जा रहा है।

न्याय न मिलने पर अनशन

मज़दूरों ने जिलाधिकारी को अवगत कराया है कि उनकी उम्र अभी 60 वर्ष की हुई भी नहीं है। जिसके सारे प्रमाण गैल के अधिकारियों के पास जमा हैं फिर भी उन्हें निकाल दिया गया है। मजदूरों ने जिला मुख्यालय पहुंच जिलाधिकारी से दोबारा रोजगार दिलाए जाने की बात कह कर साफ तौर पर कहा है। न्याय न मिलने पर अनशन करने को भी तैयार हैं।बता दें गैल में कार्यरत मज़दूरों की मानें तो उन्हें जिस बढ़ती उम्र का हवाला देकर कार्यमुक्त किया गया है। वास्तविकता में उनकी उम्र अभी वहां तक पहुंची भी नहीं है और गैल प्रसासन उन्हें 60 वर्ष का बता कर मज़दूरों को कार्यमुक्त कर उन से पीछा छुड़ाने के लिए आतुर दिखाई पड़ रहा है। मज़दूरों ने जिला अधिकारी से कहा है कि उनकी जांच करा ली जाए और उन्हें पुनः रोजगार दिया जाए।

रोजगार पर परेशान

बता दें इससे पहले भी करीब एक माह के अनशन पर गैल के सामने बैठे भू विस्थापित लोगों ने धरना प्रदर्शन किया था। अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी किया था गैल द्वारा लगातार ऐसे मामले प्रशासन के सामने आ रहे हैं। भारत के प्राधानमंत्री जहां एक ओर गरीब मज़दूरों के हित और उनको रोजगार दिलाए जाने की बात करते हैं। वहीं, भारत के नवरत्नों में गिनी जाने वाली गैल पाता जैसी इकाइयां मज़दूरों की उपेक्षा का कारण बनती दिखाई दे रही है। अब ऐसे में जिला प्रशासन इन मज़दूरों की मदद के रूप में क्या रुख अपनाएगा ये देखने वाली बात है।