औरैया. अजीतमल विकास खंड के गांव सबलपुर में ग्राम समाज की जमीन पर बना कुआं लोगों की आस्था से जुड़ा है। मान्यता है क़ि किसी व्यक्ति को कुत्ते द्वारा काटने पर इसका पानी पीने से कुत्ते के काटने का जहर का असर खत्म हो जाता है। लोगों का मानना है क़ि 150 वर्ष पूर्व किसी संत ने वरदान दिया था क़ि यहां का पानी पीने से कुत्ते के काटने पर जहर का असर नहीं होगा। इसी के चलते सवलपुर गांव ही नहीं दूर-दराज के जनपदों के सभी धर्मों के लोग यहां कुएं का पानी पीते हैं।
लोगों का मानना है क़ि पानी पीने के साथ गुड़ और चने की दाल के दाने भी खाए जाते हैं। इसलिये लोग अपने साथ गुड व चने की दाल लेकर आते हैं। पानी पीने के वाद शेष बची गुड़ और दाल पानी पिलाने वाले पुरोहित को ही दे देते हैं। पानी पीने के लिये शनिवार और रविवार के दिन को शुभ मानते हैं।
रेबीज इंजेक्शन लगवाने के बाद भी आते हैं लोग
पानी पीने को अंधविश्वास या ढोंग कहने वाले लोग भी यहां तब आते हैं, जब उनके किसी सगे-संबंधी को कुत्ता काट लेता है। लोग एंटी रेबीज वेक्सीन लगवाने के बाद भी इस कुएं से पानी पीने के लिये आते हैं।
वर्षों से लोगों को प्यास बुझाता है कुआं
पीड़ित व्यक्ति को कुत्ते के जहर से राहत मिले या न मिले, लेकिन गांव के पूर्वी किनारे पर पीपल की छांव में बना यह कुआं वर्षो से ग्रामीणों व राहगीरों की प्यास बुझाता आ रहा है। लेकिन पुर्वजों की धरोहर प्राचीन कुआं ग्राम प्रबंधन व प्रशासन की उदासीनता का शिकार है। कुएं की दीवारे जर्जर हो रही हैं। इसके पानी में कीड़े मारने वाली दवाई न पड़ने से पानी प्रदूषित हो रहा है।