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मां की परवरिश के बिना ही शिक्षा ने जनपद में किया टॉप, इंजीनियरिंग क्षेत्र में पहचान बनाने की है तमन्ना

अब बेटियां किसी से कम नहीं है। किसी भी क्षेत्र में हो बेटियों ने अपना नाम रोशन किया है।
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औरैया

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Mahendra Pratap Singh

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Updated: 2 May 2018, 12:11 PM IST

up board exam 2018 shiksha do topper in district

औरैया. अब बेटियां किसी से कम नहीं है। किसी भी क्षेत्र में हो बेटियों ने अपना नाम रोशन किया है। ऐसा ही कुछ जनपद के अजीतमल में एक बेटी ने किया। जिसकी मां की 3 साल पहले ही मौत हो चुकी थी। बाबजूद घर मे सबसे छोटी होने बाद पढ़ाई में उसने कमी नहीं रखी।

लड़कियों में आगे बढ़ने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही

गौरतलब है कि आज भी समाज मे लड़कियों को शिक्षा के लिए दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। तमाम बंदिशो के बाद भी लड़कियों में शिक्षा को लेकर जो लगन है उसी के परिणाम है कि अव्यवस्था और सनसांधनो के अभाव के बाबजूद भी लड़कियों में आगे बढ़ने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। बेटियाॅ पूरे परिवार का बोझ उठाकर भी जनपद का नाम रोशन कर सकती है। यह कर दिखाया है अजीतमल क्षेत्र के ग्राम हालेपुर के एक किसान की बेटी शिक्षा पाल ने। जिसने हाईस्कूल परीक्षा परिणाम में जनपद की टाप टेन सूची में अपना स्थान बना लिया। हालेपुर में लोकतंत्र सेनानी रामनारायण पाल के पुत्र मदन सिंह पाल की तीन बेटियों में सबसे छोटी बेटी शिक्षा पाल ने हाईस्कूल की परीक्षा में 90.17 प्रतिशत अंक पाकर जनपद की टाप टेन सूची में स्थान बना लिया।

विद्यालय का ही नहीं अपितु जनपद का नाम रोशन किया

शिक्षा पाल की मां ने बीते तीन वर्ष पूर्व इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। पत्नी के निधन के वाद बेटे के अभाव में मदन सिंह की बेटिया ही उनके बुढ़ापे की लाठी होगी। शिक्षा की बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। दूसरी बहन नेहा फिरोजाबाद शहर से बीटीसी कर रही है। माॅ की निधन और बड़ी बहन माण्डवी की शादी व दूसरी बहन नेहा के बीटीसी करने को लेकर घर पर परिवार के खान पान की व अन्य जिम्मेदारी शिक्षा पाल पर आ पड़ी। परिवार की जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुये हाईस्कूल की परीक्षा की तैयारी की और अच्छे अंक लाकर घर परिवार विद्यालय का ही नहीं अपितु जनपद का नाम रोशन किया।

इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की तमन्ना

शिक्षा पाल ने बताया कि आईआईटी कर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की तमन्ना है। और इंजीनियर बनकर देश की सेवा करने की अपनी मां का सपना पूरा करेगी। मां की याद मेें उसकी आॅखें अवश्य भर आती है लेकिन पिता और बाबा का लाड़ प्यार शिक्षा की आंखों के आंसुओं को पोंछ देता है। वह इस सफलता का श्रेय अपने पिता, बाबा औरअपने विधायल बाल विकास संस्थान इण्टर कालेज के अध्यापक अतुल शुक्ला सहित प्रधानाचार्य सुरेन्द्र तिवारी को देती है। जिनकी समय समय पर प्रेेरणा से उसे मार्गदर्शन किया जाता रहा है।