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खरीदें CNG कार या घर लाएं इलेक्ट्रिक वाहन, कौन-सी गाड़ी आपके लिए होगी पैसा वसूल, जानिए सभी सवालों जवाब

CNG पर चलने वाले वाहन में पेट्रोल पर चलने की तुलना में परफॉर्मेंस में 5 से 10% की कमी होती है। यदि सीएनजी टैंक खाली है, तो आप अपनी कार को पेट्रोल मोड में भी चला सकते हैं

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Petrol Vs CNG

भारत मे बढ़ती ईंधन की कीमत सबको परेशान कर रही हैं, अगर आप भी ईंधन की बढ़ती कीमतों या अपनी कार के कम माइलेज को लेकर चिंतित हैं। तो यह लेख आपके लिए है। इस बात से सभी परिचित हैं, कि पेट्रोल और डीजल दोनों के लिए ईंधन की कीमतों में 100 रुपये की तेजी के साथ, टैंक में ईंधन भरना अब आम आदमी के लिए जेब खाली करने जैसा है।

हालांकि, वर्तमान में सीएनजी या इलेक्ट्रिक कारों जैसे अन्य विकल्प भी मौजूद हैं जिन्होंने स्थिति पर नियंत्रण कर लिया है, और कार मालिकों के लिए राहत का काम कर रहे हैं। आइए आपको बताते हैं, सीएनजी बनाम इलेक्ट्रिक कारों के फायदे और नुकसान। जिससे आप अपना फैसला आसानी से ले सकते हैं, कि आपको कौन सी कार चुननी चाहिए।

CNG कारो के फायदे


सीएनजी एक वैकल्पिक ईंधन विकल्प है, जो कई वर्षों से बाजार में मौजूद है। वर्तमान में कुछ कारों पर फ़ैक्टरी-फिटमेंट के रूप में सीएनजी किट भी दी जा रही हैं। सच यह है, सिलेंडर अधिकांश Boot Space स्पेस लेता है लेकिन बदले में अधिक माइलेज मिल जाता है। जहां एक अधिकृत आफ्टरमार्केट डीलर से आप अच्छा सीएनजी फिटमेंट खरीद सकते हैं, जिसके लिए आपको लगभग 60,000 रुपये चुकाने होंगे।


सीएनजी आपको पेट्रोल पर भी कार चलाने की आजादी देती है। यदि सीएनजी टैंक खाली है, तो आप अपनी कार को पेट्रोल मोड में भी चला सकते हैं और निकटतम पंप पर सीएनजी टैंक में ईंधन भर सकते हैं। इसके अलावा सीएनजी पेट्रोल या डीजल की तुलना में अधिक सफाई से जलती है, जिसका अर्थ है कि टेलपाइप उत्सर्जन बहुत कम है। तो, मूल रूप से, सीएनजी कारें बहुत कम प्रदूषण करती हैं, जिसके चलते ये पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल होती हैं।


CNG कारों के नुकसान

सीएनजी अभी भी एक उभरता हुआ वैकल्पिक ईंधन प्रकार है, और ज्यादातर दिल्ली और मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में पाया जाता है, और यही एकमात्र कारण है कि अधिकांश कार निर्माता अपनी मास-मार्केट कारों के सीएनजी से लैस वर्जनों को लॉन्च करने के बारे में गहरा विचार करते हैं। इसके साथ ही यदि आप एक सीएनजी वाहन के मालिक हैं तो यह आपके लिए एक बहुत बड़ा दर्द बिंदु रहा होगा।

क्योंकि सीएनजी से चलने वाली सेडान में हैचबैक की तुलना में अधिक Boot Space बचता है, लेकिन फिर भी, यह एक प्रमुख चिंता का विषय है। एक छोटी हैचबैक में Boot Space पूरी तरह से सीएनजी टैंक द्वारा भरा जाता है और फिर, सामान के लिए आपको आफ्टरमार्केट रूफ कैरियर के लिए जाना पड़ सकता है।


Electric Cars के फायदे

वर्तमान में इलेक्ट्रिक कारों को खरीदना अब पहले से आसान हो गया है क्योंकि सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर कई कर लाभ देना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, कई राज्यों में सब्सिडी है जो खरीद मूल्य को कम करती है। यदि आप पेट्रोल या सीएनजी के साथ कुल लागत की तुलना करते हैं, तो इलेक्ट्रिक वाहन बहुत सस्ते विकल्प बन जाते हैं।

वहीं ऑल-इलेक्ट्रिक वाहनों को सिंगल-गियर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ पेश किया जाता है जो नेश्नल हाईवे और यातायात से प्रभावित सड़कों पर उपयोग करने में सुविधाजनक बनाता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों में शून्य टेलपाइप उत्सर्जन होता है, जो उन्हें सीएनजी से चलने वाले वाहनों की तुलना में अधिक हरा-भरा बनाता है।


Electric cars के नुकसान


इस बात से बिल्कुल भी नकारा नहीं जा सकता कि लोग इलेक्ट्रिक कार के अपने निर्णय को वापस लेते हैं। हालांकि वर्तमान में एआरएआई एक उच्च रेंज के आंकड़े का दावा करता है, लेकिन ईवी की ड्राइविंग रेंज विभिन्न स्थितियों पर निर्भर करती है जो अक्सर किसी के नियंत्रण में नहीं होती हैं। भारत एक विकासशील देश है, और चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता अभी भी काफी कम है।

इसके अलावा कीमत भी प्रमुख कारण है, देश की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक एसयूवी, टाटा नेक्सन 14 लाख रुपये से शुरू होती है, जबकि इसका पेट्रोल मॉडल सिर्फ 7.20 लाख रुपये, एक्स-शोरूम, दिल्ली से शुरू होता है। यहां कीमत को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है, कि ग्राहक कौन सा वाहन चुनेगा।