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मंदिर वहीं बनेगा, जहां रामलला विरजमान है, मस्जिद के लिए दूसरी जगह मिलेगी

मंदिर वहीं बनेगा, जहां रामलला विरजमान है, मस्जिद के लिए दूसरी जगह मिलेगी

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मंदिर वहीं बनेगा, जहां रामलला विरजमान है, मस्जिद के लिए दूसरी जगह मिलेगी

मंदिर वहीं बनेगा, जहां रामलला विरजमान है, मस्जिद के लिए दूसरी जगह मिलेगी

अयोध्या. सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या पर अपना एतिहासिक फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक विवादिज ढांचे की जमीन हिंदुअों को दी जाए। सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि मुसलमानों को मस्जिद के लिये दूसरी जगह मिलेगी। मुस्लिम पक्ष अपना कब्जा साबित करने में नाकाम रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस फैसले के बाद पक्षकारों के पास कोई और विकल्प बचा है या फिर यह फैसला अंतिम है। क्या इस फैसले के खिलाफ कोई पुनर्विचार याचिका दायर हो सकती है ? इस सवाल पर विधि विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले के खिलाफ भी पुनर्विचार याचिका दरायर की जा सकती है। लेकिन पुनर्विचार याचिका की सुनवाई वही बेंच करती है जो फैसला सुनाती है, लेकिन मौजूदा बेंच के अध्यक्ष जस्टिस रंजन गोगोई आठ दिन बाद रिटायर हो जाएंगे तब क्या होगा?

इस मामले में पक्षकारों द्वारा रिव्यू पिटीशन दाखिल की जा सकती है। भले ही चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो जाएंगे। बाद में पिटीशन आई तो अगले सीजेआई तय करेंगे कि पांचवा जज कौन होगा। रिव्यू पिटीशन की ओपन कोर्ट में नहीं बल्कि चेंबर में सुनवाई होगी। यदि मामले में 17 नवंबर के पहले पुनर्विचार याचिका आती है तो इसे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ही सुनेगी। लेकिन यदि यह पिटीशन इसके बाद आई तो अगले चीफ जस्टिस तय करेंगे कि रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई के लिए मौजूदा पीठ में जस्टिस गोगोई की जगह पांचवा जज कौन होगा।