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मंदिरों में न प्रसाद मिलेगा न चरणामृत, सिर्फ 5 लोगों की ही प्रवेश की अनुमति

- नवरात्र पर शक्तिपीठों पर दर्शन-पूजन कर रहे भक्त- कोविड प्रोटोकॉल के तहत की पूजा की अनुमति

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क

अयोध्या/मिर्जापुर. मां की आराधना का नौ दिवसीय पर्व शुरू हो चुका है। लेकिन नवदुर्गा की भक्ति में भी कोराना का डर भारी पड़ रहा है। प्रदेश के अधिकांश देवी मंदिरों में कोविड दिशा निर्देशों के अनुसार भक्तों को पूजन-अर्चन की इजाजत दी गयी है। एक साथ अधिकतम पांच लोगों को ही गर्भगृह में जाने की इजाजत है। किसी भी मंदिर में प्रसाद और चरणामृत का वितरण नहीं किया जा रहा है।

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अयोध्या में सनातन परंपरा से हिंदी नववर्ष मनाया जा रहा है। अयोध्या के तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने भक्तों से कोविड-19 का पालन करते हुए घरों में ही नव वर्ष मनाने की अपील की है। महंत परमहंस दास तपस्वी छावनी से रामलला के दर्शन के लिए दंडवत मुद्रा करते हुए पहुंचे। उन्होंने राम जन्मभूमि परिसर में श्री रामलला पूजन किया।

मां विंध्यवासनी के दर्शन के लिए कोविड निगेटिव रिपोर्ट जरूरी

विंध्याचल में नवरात्र में दर्शन-पूजन इस बार बहुत आसान नहीं है। भक्तों को ४८ घंटे पहले की कोरोना निगेटिव रिपोर्ट लाने के बाद ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिल रही है। पूरे नवरात्र में रात्रि 9 से सुबह 6 बजे तक दर्शन पर रोक है। मंदिर में 5 लोगों से अधिक को एक बार में प्रवेश नहीं दिया जा रहा। मां विंध्यवासनी के दर्शन सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के अनुसार लाइन में लगकर मिल रहे हैं। इस तरह इस साल दिनभर में बमुश्किल पांच हजार लोग ही दर्शन कर पाएंगे। जबकि इसके पहले नवरात्रि में लाखों लोग मां के दर्शन करते थे। बिना मास्क के दर्शन नहीं हो रहे हैं। मंदिर में दर्शन पूजन के लिए भक्तों की लम्बी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। प्रशासन को भीड़ नियंत्रित करने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। पुरोहितों का कहना है कि नाइट कफ्र्यू के कारण रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक मंदिर बंद होने की वजह से रात्रि में ही मंदिर में भीड़ इकठ्ठा हो गयी।