अयोध्या बनेगी वैदिक सिटी, छह द्वार कराएंगे त्रेतायुग का अहसास

- रामनगरी का हो रहा कायाकल्प
- रोपे जाएंगे रामायणकालीन पौधे
- विजन डाक्यूमेंट पर काम शुरू

By: Mahendra Pratap

Published: 12 Jun 2021, 05:06 PM IST

महेंद्र प्रताप सिंह

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

अयोध्या. Rejuvenation of Ramnagari Ayodhya आने वाले दिनों में रामनगरी में प्रवेश करते ही पर्यटकों को रामायणकालीन अयोध्या का अहसास होगा। अयोध्या को भव्य धार्मिक रूप देने के लिए शहर के सभी प्रवेश मार्गों पर बागों से घिरे भव्य राम द्वार बनाए जाएंगे। इनके किनारे खूबसूरत बाग लगायी जाएगी। इसे रामायण वाटिका कहा जाएगा। उप्र सरकार के कई विभाग अंतरराष्ट्रीय फर्म ली एसोसिएट, एलएंडटी और सीपी कुकरेजा आर्कीटेक्ट के साथ मिलकर अयोध्या को इंटरनेशनल मार्डन सिटी के रूप में विकसित करने की प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।

UP Politics : आसान नहीं होगा जितिन को एमएलसी बनाना, भाजपा में बढ़ सकती है गुटबाजी

प्रबिशि नगर कीजै सब काजा...

रामचरित मानस में चौपाई है-प्रबिशि नगर कीजै सब काजा, हृदय राखि कौशलपुर राजा। यानी अयोध्यापुरी के राजा श्री रघुनाथजी को हृदय में रखकर नगर में प्रवेश करके सब काम कीजिए। त्रेतायुग की इसी परिकल्पना को साकार करने के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण रामनगरी के विकास पर काम कर रहा है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह कहते हैं, अयोध्या शहर में प्रवेश के लिए छह द्वार हैं। रामनगरी को भव्य धार्मिक रूप देने के लिए इन सभी प्रवेश मार्गों पर विशालकाय राम द्वार बनाए जाएंगे। यह पहल पवित्र शहर को एक छोटे से शहर से एक नए और आधुनिक शहर में बदलने की कार्ययोजना का एक हिस्सा है।

अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या...

अथर्ववेद में वर्णित है-अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या...। यानी आठ चक्रों और नौ द्वारों से युक्त अयोध्या देवनगरी है। अब अयोध्या के सुंदरीकरण की प्रक्रिया में 9 द्वारों में से छह द्वारों के निर्माण की रूपरेखा तैयार की गयी है। विजन डॉक्यूमेंट के हिसाब से यह सभी छह द्वार अयोध्या को प्रयागराज, गोंडा, वाराणसी, लखनऊ, रायबरेली व गोरखपुर से जोडऩे वाले मार्गों पर बनेंगे। यह सिक्स लेन, फोर लेन तथा टू लेन पर पर आधारित होंगे। एक प्रवेश द्वार की अनुमानित लागत 10 से 15 करोड़ आएगी। ये द्वार शिलाओं से निर्मित होंगे।

सफल पूगफल कदलि रसाला...

सफल पूगफल कदलि रसाला। रोपे बकुल कदंब तमाला। तुलसीदास लिखते हैं कि श्रीरामचंद्र जी के विवाहोपरान्त बारात लौटकर अयोध्या आती है तो अयोध्या नगरी में विविध पौधों का रोपण किया जाता है। फल सहित सुपारी, केला, आम, मौलसिरी, कदंब और तमाल के वृक्ष लगाए गए। प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी विकास दीपक कुमार का कहना है कि अयोध्या में रामायण काल के इस युग को दर्शाने के लिए बुनियादी ढांचे के अलावा संपूर्ण रामनगरी को रामयाणकालीन वनस्पतियों से आच्छादित किया जाएगा। अशोक पीपल, बरगद, बेल, मौलश्री और जामुन आदि के पेड़ लगाए जाएंगे। शहर में औषधीय वाटिकाएं विकसित की जाएंगी।

अयोध्या को मार्डन वैदिक सिटी बनाने की तैयारी

अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप रामनगरी को आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित किए जाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसे मार्डन वैदिक सिटी बनाया जाएगा।

प्रवेश द्वारों के नाम

लखनऊ मार्ग-श्रीराम द्वार
गोरखपुर मार्ग-हनुमान द्वार
गोंडा मार्ग-लक्ष्मण द्वार
प्रयागराज मार्ग-भरतकुंड के निकट भरत द्वार
वाराणसी मार्ग-जटायु द्वार
रायबरेली मार्ग-गरुड़ द्वार
इन स्थानों पर बनेंगी धर्मशाला
-लखनऊ मार्ग पर मुमताजनगर और घाटमपुर के बीच-600 कमरे
-रायबरेली मार्ग पर मऊ यदुवंशपुर में-200 कमरे
-प्रयागराज मार्ग पर मैनुद्दीनपुर में -200 कमरे
आजमगढ़ मार्ग पर दशरथसमाधि स्थल के निकट-250 कमरे
-गोंडा मार्ग पर कटरा के पास-370 कमरे
-गोरखपुर मार्ग-स्थल चयन की प्रक्रिया जारी।

Mahendra Pratap
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned