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वेटिकन सिटी की तर्ज पर बनेगी अयोध्या, पत्थरों की सफाई के बाद इन्हें प्लास्टिक में रखा जाएगा

रामनगरी अयोध्या में एक ओर लोगों की निगाहें मंदिर निर्माण (Ram Mandir Construction) पूरा होने पर टिकी हैं, तो वहीं दूसरी ओर सरकार ने अयोध्या की खूबसूरती में चार चांद लगाने के लिए उसे वेटिकन सिटी की तर्ज पर अंतर्राष्ट्रीय ख्याती देने की तैयारी में जुट गई है

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वेटिकन सिटी की तर्ज पर बनेगी अयोध्या, पत्थरों की सफाई के बाद इन्हें प्लास्टिक में रखा जाएगा

वेटिकन सिटी की तर्ज पर बनेगी अयोध्या, पत्थरों की सफाई के बाद इन्हें प्लास्टिक में रखा जाएगा

अयोध्या. रामनगरी अयोध्या में एक ओर लोगों की निगाहें मंदिर निर्माण (Ram Mandir Construction) पूरा होने पर टिकी हैं, तो वहीं दूसरी ओर सरकार ने अयोध्या की खूबसूरती में चार चांद लगाने के लिए उसे वेटिकन सिटी की तर्ज पर अंतर्राष्ट्रीय ख्याती देने की तैयारी में जुट गई है। इसके लिए विदेश मंत्रालय ने अयोध्या शोध संस्थान को पत्र लिखा है, जिसमें रामायण इन्साइक्लोपीडिया (विदेशों में प्रभु श्री राम का वर्णन) समेत अयोध्या के विकास पर कई अहम सुझाव दिए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि धर्मनगरी के लिहाज से महत्वपूर्ण नगरी अयोध्या को भारतीय धर्म, अध्यात्म, संस्कृति के मूर्त-अमूर्त स्वरूप के नाड़ीतंत्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। पत्र के अनुसार वेटिकन सिटी जैसे दुनिया के अन्य प्रमुख धार्मिक शहरों की ही तरह अयोध्या को भी भगवान राम और रामकथा से जुड़े हस्तशिल्प, स्मारक, रिप्लिका के हब के रूप में एक ब्रांड बनाए जाने की बात कही गई है।

पत्र में कहा गया है रामायण और भगवान राम के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित ऐसी हाई क्वालिटी मल्टीमीडिया शैक्षिक सामग्री विकसित किया जाना चाहिए जिसमें दार्शनिकता, ऐतिहासिकता, कलात्मकता के साथ तकनीक का भी समावेश हो। रामायण गाथा और मंदिर निर्माण को अंतर्राष्ट्रीय ख्याती मिले इसके लिए यूरोप, लैटिन अमेरिका, मध्य एशिया के देशों के साथ मिलकर भगवान राम की पूरी जीवनगाथा से जुड़ी मूर्तियों, स्मारकों, साहित्य, कला आदि पर विस्तृत शोध और सर्वे और अनुवाद किए जाने का सुझाव दिया गया है।

कार्यशाला में रखे पत्थरों को चमकाने के काम ने पकड़ी रफ्तार

राम मंदिर के लिए पत्थरों को साफ करने व चमकाने का कार्य शुरू हो गया है। वह पत्थर जो अभी तक खुले आसमान के नीचे रखे थे, काफी मैले हो गए हैं, लेकिन दिल्ली की केएलए कंस्ट्रक्शन कंपनी इनको चमकाने के काम में लग गई है। अनुमान है कि अगले 3 से 4 महीनों में सभी पत्थर साफ हो जाएंगे। हालांकि मंदिर निर्माण को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यह पत्थर 28 वर्षों से ऐसे ही रखे हैं और इन्हें श्रीरामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला में तराशने का काम शुरू हो गया है। केएलए कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इसके लिए दिल्ली से 10 और मजदूर बुलाए हैं। पहले 5 श्रमिक ही इस काम में लगे हुए थे। अभी और मजदूरों को इसके लिए बुलाया गया है। कंपनी का कहना है कि करीब 23 प्रकार के कैमिकल्स के इस्तेमाल से पत्थरों की साफ किया जा रहा है।

दरअसल, खुले में रखे होने के कारण पत्थरों में तरह-तरह की गंदगी जमा हो गई है, कई जगह स्क्रैच भी है। जिसे हटा पाना काफी मुश्किल है। ऐसे में इन्हें साफ करने और चमकाने में वक्त लग रहा है। पुराने होने की वजह से पत्थरों के साथ बेहद सावधानी बरती जा रही है। पत्थरों की सफाई कर इन्हें पॉलिथिन में रखा जाएगा।

राम जन्मभूमि कार्यशाला का कार्यभार देखने वाले सुपरवाइजर अन्नू भाई सोनपुरा का कहना है कि लंबे अरसे से राम मंदिर निर्माण के लिए तराश कर रखे गए पत्थरों पर गंदगी जमा हो गई थी। अब पत्थरों पर सफाई का कार्य शुरू हो गया है। राम जन्मभूमि परिसर में पत्थरों को रखने के लिए शेड का भी निर्माण किया जाना है और बुनियाद की खुदाई के बाद साफ पत्थरों को वहां सुरक्षित रखा जाएगा। मंदिर निर्माण में इन पत्थरों का इस्तेमाल किया जाएगा।

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