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दोनों पैरों से लाचार अयोध्या की इस आयरन लेडी की कहानी सुनकर रो पड़ेंगे आप…

सात जन्म तक साथ निभाने वाले ने सात साल भी नही निभाया साथ,लेकिन नही हारी ज़िन्दगी की जंग बनी लोगों के लिए मिसाल

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Disabled Women is teaching his child by running e-rickshaw

दोनों पैरों से लाचार अयोध्या की इस आयरन लेडी की कहानी सुनकर रो पड़ेंगे आप...


अनूप कुमार
अयोध्या : दिव्यांग है लेकिन मजबूर नहीं। पैरों से लाचार है लेकिन किसी की मोहताज नहीं। पति ने छोड़ दिया लेकिन भीख नहीं मांगती। अयोध्या की रहने वाली दिव्यांग कांति पांडे के जज्बे को देखकर आप भी चकित रह जाएंगे।दोनों पैरों से लाचार दिव्यांग यह महिला अयोध्या की सड़कों पर ई रिक्शा चला कर अपने 8 वर्षीय बच्चे का पालन पोषण कर रही है।दोनों पैरों से लाचार यह दिव्यांग महिला अपना भविष्य तो नहीं बना पाई लेकिन अपने बच्चे का भविष्य बनाने के लिए ई रिक्शा चलाकर एक मां होने का फर्ज निभा रही है।

सात जन्म तक साथ निभाने वाले ने सात साल भी नही निभाया साथ,लेकिन नही हारी ज़िन्दगी की जंग बनी लोगों के लिए मिसाल

आज हम आपको रूबरू करायेंगे भगवान राम की नगरी अयोध्या की उस महिला से जो दोनों पैरों से लाचार है लेकिन इरादे मजबूत हैं। अपनों से ठुकराई दिव्यांग महिला रोजी रोटी चलाने के लिए अयोध्या की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाती है। अयोध्या के काशीराम कॉलोनी में रहने वाली यह दिव्यांग महिला एक बच्चे की मां है। 8 वर्ष का बच्चा आदर्श अयोध्या के महर्षि विद्यालय में पढ़ाई करता है और जो कुछ समय पढ़ाई से बचता है तो ई रिक्शा में बैठकर अपनी मां की मदद भी करता है। कांति पांडे नाम की यह दिव्यांग महिला मूलतः सुल्तानपुर की रहने वाली है। सुल्तानपुर के ही एक व्यक्ति से उसकी शादी हुई लेकिन वो पति का फर्ज नहीं निभा पाया और अपनी पत्नी को बच्चे के साथ छोड़ दिया।

8 साल के मासूम को ई रिक्शा की बगल सीट पर बैठाकर रोज़ निकल पड़ती है सफ़र पर

भगवान राम की नगरी अयोध्या पहुंची यह दिव्यांग महिला पहले तो माई बाड़ा में रहती थी उसके बाद काशीराम कॉलोनी में एक कमरा मिल जाने के बाद वहीं पर किराने की दुकान खोली लेकिन उधारी के चलते इसकी दुकान नहीं चल पाई और बंद हो गई लेकिन फिर भी उसने हार नहीं मानी।उसने सब्जी की दुकान भी खुली लेकिन दुर्भाग्य से वह भी बंद हो गई फिर उसने ई रिक्शा खरीदने के लिए कोशिश की लेकिन लगभग सवा लाख रुपए के आने वाले नये ई रिक्शे को तो नहीं खरीद पाई लेकिन 25 हज़ार रुपये इकट्ठा कर एक पुराना ई-रिक्शा खरीद लिया और फिर शुरू कर दी जिंदगी से संघर्ष करना। संघर्ष करते-करते अब यह महिला प्रतिदिन 250 से 300 रुपये तक कमा लेती है और अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए अयोध्या के ही महर्षि विद्यालय में ऐडमिशन भी करवा दिया है। कहते हैं अगर जज्बा है तो कुछ भी मुमकिन है।


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