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जन्म भूमि सम नहीं प्रिय सोहूं, या प्रसंग जाने कोऊ कोऊ…

लंका से रावण पर विजय प्राप्त कर भगवान राम जब पुष्पक विमान पर सवार थे तब उन्होंने हनुमान और बानर सेनानियों को अयोध्या को दिखाते हुए उसका बखान किया था।

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अयोध्या. लंका से रावण पर विजय प्राप्त कर भगवान राम जब पुष्पक विमान पर सवार थे तब उन्होंने हनुमान और बानर सेनानियों को अयोध्या को दिखाते हुए उसका बखान किया था। उन्होंने कहा था-यद्यपि सब बैकुंठ बखाना, वेद पुरान निगम सब जाना, जन्म भूमि सम नहीं प्रिय सोहूं, या प्रसंग जाने कोऊ कोऊ...। दीपावली के मौके पर अयोध्या में कुछ इसी प्रसंग को दोहराया जाने वाला है। दीपोत्सव में पुष्पक विमान होगा, रथ होगा, घुड़सवार होंगे और सैनिक भी होंगे। विजय पताकाओं और पुष्प द्वारों सुसज्जित अयोध्या होगी।


हर कोई है उत्साहित


अयोध्या के ८० साल के साधु अवधेशानंद कहते हैं कि आज से ६० साल पहले जब अयोध्या की दिवाली मनती थी तब लगता था कि हम वाकई राम के राज्य में रह रहे हैं। वे बताते हैं कि बहुत छोटा था जब घर छोड़ दिया। अयोध्या ही अब हमारा घर है। लेकिन अयोध्या की हर बात हमें अपनी जन्मभूमि की याद दिलाती है। लेकिन जैसे-जैसे समय बदला तीज-त्योहार भी बदलते गए। दिवाली भी महज एक त्योहार बन कर रह गयी। लेकिन इस बार जैसे चर्चाएं सुन रहे हैं उससे लगता है कि हम फिर से अपनी जन्मभूमि का अहसास कर सकेंगे। वे कहते हैं कि सरकारी तैयारियों से तो यही लगता है कि इतिहास दोहराया जाएगा।


पहले भी होती थी पुष्पवर्षा


रामलला से थोड़ी दूर एक कुटिया में राम नाम का जाप कर रहीं करीब ७५ साल की एक बुर्जुग पुजारिन कहती हैं कि आज से ५० साल पहले जब अयोध्या की दिवाली मनायी जाती थी तब भगवान राम की शोभायात्रा में अयोध्यावासी पुष्प वर्षा करते थे। लगता था वाकई राम अपने घर लौटे हैं। लेकिन यह सब बीच में लुप्त हो गया। अब सुन रहे हैं कि एक बार फिर विजयी राम का स्वागत करने के लिए लोग छतों पर खड़े होकर पुष्पवर्षा करेंगे। पूरी अवध पुरी दुल्हन की तरह सज रही है। दीप श्रृखलाएं जनता के साथ भगवान राम का स्वागत करेंगी। त्रेता युग की राम कथा और राम के राज्याभिषेक को दोहराने के लिए अयोध्या के राजा और उनके बेटे यतीन्द्र मिश्र से लेकर अयोध्या के साधु-सन्यासी और आमजन उत्साहित हैं।


क्या कहता है संत समाज


साधु सत्येन्द्र दास कहते हैं-हमें भले ही सरकारी आमंत्रण न मिला हो, पर हम राम भगवान की अगवानी करने जरूर जाएंगे। और इस इतिहास के साक्षी बनेंगे। राम घाट के पुजारी संत निरूपानंद महराज कहते हैं कि वे पावन पर्व पर उस पल के साक्षी होने आए हैं जिसमें अयोध्या को त्रेता युग में दिखाया जाएगा। वे रोमांचित हैं और कहते हैं कि वे तो कल की कल्पनाओं में खोए हैं। राम की पैड़ी पर पूजा-अर्चना करा रहे बुजुर्ग पंडित दाता पांडेय कहते हैं कि यह बेहद अद्भुत दृश्य होगा। ऐसा सिनेमा में ही देखा था। सरकार ने भगवान राम के पुष्पक विमान के जरिए ही राम कथा घाट पर लाने की तैयारी की है।


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