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Live Report : मंदिर मस्जिद झगड़े के लिए नहीं इस बार एक महोत्सव की चर्चा लेकर अंतर्राष्ट्रीय फलक पर पहुंचेगी अयोध्या

अयोध्या के लोगों के चेहरे पर झलकी ख़ुशी कम से कम बदले अयोध्या की पहचान

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अयोध्या. अयोध्या ये एक ऐसा नाम है जिसका जिक्र जुबान पर आते ही एक ऐसी विवादित तस्वीर तस्वीर जेहन में कौंध जाती है जिसकी पहचान पूरी दुनिया में हिंदू मुस्लिम के बीच गहरी खाई खोदने वाले मुद्दे के रूप में है। अयोध्या जिस के नाम का शाब्दिक अर्थ ही है कि जहां कभी युद्ध ना हुआ हो लेकिन मंदिर मस्जिद की लडाई ने विभिन्न धर्मों की आस्था की केंद्र रही इस पावन धर्मस्थली को बेगुनाह इंसानों के लहू से रंग दिया। अयोध्या की सबसे बड़ी पहचान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की जन्म स्थली के रूप में है बावजूद इसके पूरी दुनिया में अयोध्या का जिक्र आते ही उस विवाद की कहानी जेहन में उतर जाती है जिसे लेकर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मुसलमान गुस्से से भर जाते हैं और यह गुस्सा मुसलमान ही नहीं हिंदू संप्रदाय के मन में भी बराबर रहा है । हालांकि वक्त बीतने के साथ अब यह घाव भरने को हैं लेकिन आज भी अयोध्या की पहचान एक विवादित शहर के रूप में ही है।

अयोध्या के लोगों के चेहरे पर झलकी ख़ुशी कम से कम बदले अयोध्या की पहचान

लगभग एक सदी का वक्त बीत जाने के बाद अब एक ऐसा मौका आया है जब अयोध्या को लोग एक विवाद के लिए नहीं बल्कि एक ऐसे महाउत्सव के रूप में जानेंगे जो अयोध्या को एक नई पहचान देने वाला है ।आम तौर पर देसी विदेशी मीडिया मंदिर मस्जिद झगड़े को लेकर अक्सर अयोध्या में इकट्ठा होती है और हर बार अयोध्या की जो तस्वीर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर उभरकर आती है । वह यही होती है कि आखिरकार अयोध्या में मंदिर बनेगा या मस्जिद । लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने साल 2017 में दीपावली के पर्व के 1 दिन पहले भगवान राम के राज्याभिषेक के कार्यक्रम को एक बड़ा स्वरूप देने के साथ ही इस आयोजन की चर्चा अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी होने लगी है । जिसे लेकर अयोध्या के आम लोग बाग भी बेहद खुश नजर आ रहे हैं । पत्रिका टीम ने यूं ही चलते चलते अयोध्या शहर के उन आम लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की कि आखिरकार अयोध्या में आगामी 18 अक्टूबर को होने वाले भगवान राम के राज्याभिषेक और दीप महोत्सव को लेकर वह क्या सोचते हैं

अयोध्या के लोगों से रिश्तेदार भी करते हैं ऐसे सवाल जैसे रोज़ होती है जंग

बीते 5 दशक में पहले राम जन्मभूमि मुख्य गेट के सामने और अब हनुमानगढ़ी मंदिर के करीब प्रसाद की दुकान चलाने वाले सुफल चंद्र मोर्य बंगाली दादा का कहना है कि अयोध्या में मंदिर मस्जिद के झगड़े को लेकर काफी विवाद हो चुका है खून खराबा भी हुआ है । भले ही सन 1992 के बाद अयोध्या में इस मुद्दे को लेकर कोई हिंसा नहीं हुई लेकिन आज भी जब वह अपने रिश्तेदारों के घर जाते हैं तो उनके रिश्तेदार अयोध्या को लेकर ऐसे सवाल जवाब करते हैं जैसे लगता है कि अयोध्या में कितना तनाव है । लेकिन 18 अक्टूबर को होने वाले आयोजन से सुफल चंद्र मौर्य को यह विश्वास जगा कि अगली बार जब वह अपने रिश्तेदारों के घर जाएंगे तो शायद वह उनसे अयोध्या की दिवाली के बारे में जरुर पूछेंगे ।
अयोध्या के मुख्य बाजार श्रृंगार हाट में व्यवसाय करने वाले कारोबारी बालकृष्ण वैश्य का कहना है की अयोध्या की जो तस्वीर अक्सर टीवी चैनलों पर दिखाई जाती है वह अयोध्या की संस्कृति और परंपरा से बिल्कुल विपरीत है । यह साधु संतों की नगरी है अयोध्या का प्रचार-प्रसार भगवान राम की नगरी के रूप में सिख और जैन संप्रदाय के प्रवर्तकों की कर्मस्थली तपस्थली के रूप में होनी चाहिए । लेकिन यह दुर्भाग्य है कि जब भी टीवी पर अयोध्या का जिक्र आता है तो उसी विवाद के कारण आता है जिसका दंश आज भी अयोध्या के लोग झेल रहे हैं । इस बार प्रदेश सरकार ने अयोध्या में जिस तरह के आयोजन की रुपरेखा तैयार की है उससे अयोध्या वासियों में भी ये उम्मीद जगी है कि शायद अब अयोध्या विवाद के लिए नहीं बल्कि एक उत्सव के लिए जानी जाएगी ।

फ्लैशबैक में जानिये कितनी बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बनी अयोध्या

फ्लैश बैक में जाने पर यह पता चलता है की अयोध्या की चर्चा जब भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई है हर बार मुद्दा हिंदू मुसलमान के बीच झगड़े का ही रहा है । राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवादित परिसर में मंदिर बनेगा या मस्जिद इसी को लेकर टीवी डिबेट होते रहे हैं । लेकिन यह पहला ऐसा मौका है जब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया राम मंदिर विवाद से इतर अयोध्या में होने वाले एक भव्य आयोजन की कवरेज करने के लिए अयोध्या पहुंचेगी । इससे पहले 30 नवंबर और 2 अक्टूबर सन 1990 को राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के वक्त जब कारसेवकों पर गोली चलाई गई और दर्जनों कारसेवक मारे गए उस समय भी यह मामला अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक पहुंचा । उसके बाद 6 दिसंबर सन 1992 में विवादित ढांचे के ध्वंस के समय भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया अयोध्या में मौजूद थी और इस घटना के बाद पूरे देश में दंगे हुए । लगभग एक दशक का वक्त बीतने के बाद 15 मार्च सन 2002 को शीला दान कार्यक्रम के वक्त भी पूरी अयोध्या अघोषित कर्फ्यू क्षेत्र बन गयी और पूरी दुनिया की निगाहें अयोध्या पर रही । साल 2005 में रामलला पर लश्कर के आतंकियों ने फिदायीन हमला कर अयोध्या के ह्रदय पर गहरा जख्म दिया ।वहीँ 8 सितंबर 2010 को जब विवादित स्थल को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपना फैसला सुनाया उस दौर में भी अयोध्या की चर्चा पूरी दुनिया में होती रही लेकिन मुद्दा राम मंदिर बाबरी मस्जिद झगड़े का ही रहा अयोध्या के लोगों के लिए यह सुखद अनुभव है की एक सदी बीत जाने के बाद पहली बार ऐसा मौका आ रहा है जब टीवी चैनल और अखबारों में अयोध्या की खबरें सुर्खियां बन रही है ,लेकिन किसी विवाद के लिए नहीं बल्कि अयोध्या में होने वाले एक भव्य आयोजन के लिए ।लोगों में यह उम्मीद जगी है कि शायद अब अयोध्या की वह तस्वीर बदल जाए जो अयोध्या की संस्कृति और परंपरा के अनुरूप नहीं रही है ।

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