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दिव्यांगो की मसीहा बनी डॉक्टर रानी अवस्थी, दिव्यांग बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए बिताया जीवन

राम नगरी अयोध्या में वर्षो से रहने वाली डॉक्टर रानी अवस्थी जिन्होंने अपना जीवन दिव्यांग बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए बिता दिया है।

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Doctor Rani Awasthi messiah for Divyang children in ayodhya

अयोध्या : राम नगरी अयोध्या में वर्षो से रहने वाली डॉक्टर रानी अवस्थी जिन्होंने अपना जीवन दिव्यांग बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए बिता दिया है। राम नगरी अयोध्या का धार्मिक आध्यात्मिकता से त्रेतायुग से ही जुडा रहा है। डॉक्टर रानी अवस्थी मूलतः इलाहाबाद की रहने वाली हैं लेकिन अब अयोध्या में रहती है। और अयोध्या में ही मूक बधिर विद्यालय की स्थापना कर उन दिव्यांग बच्चों की सेवा करना ही अपना धर्म बना लिया है। इस विद्यालय से निकले बच्चे आज सरकारी गैर सरकारी संस्थान में सर्विस कर स्वावलम्बी बन लोगों के लिए उदहारण बन रहे है। तथा साथ ही महिलाओ के लिए भी कई कार्य किये है जिसके लिए केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार से कई बार सम्मानित भी की जा चुकी है।

धर्म नगरी अयोध्या में रहने वाली सामाजिक महिला रानी अवस्थी इलाहाबाद की रहने वाली है जो कि अब अयोध्या में रह कर आज भी दिव्यांग बच्चो की सेवा कर रही है। अयोध्या में इस प्रकार का कार्य करने के लिए आज से लगभग 37 वर्ष पूर्व अपने परिवार के साथ आई हुई थी। जहां उन्होंने बच्चों को शारीरिक से अक्षम रहे मांग कर खाते देखा और तभी दिव्यांग बच्चों को स्वावलंबी बनाने की ठान ली और फीर पुनः अपने पति के साथ अयोध्या पहुची और अयोध्या में मंदबुद्धि और मूक-बधिर बच्चों के लिए एक स्कूल खोल कर ऐसे बच्चों को शिक्षा देने कार्य शुरू कर दिया।

डॉक्टर रानी अवस्थी ने आज भी दिव्यांग बच्चो और महिलाओं के लिए आज भी एक अच्छी रह के सोच लेकर चिंतित रहती हैं जो कि पत्रिका टीम से बात करते हुए बताया कि समाज में बच्चों और महिलाओं का अधिकार बहुत है जो कि बच्चों से आज भी उनका अधिकार छीन लिया जाता है विशेष कर दिव्यांग बच्चों को और विशेष कर लडकियों को कूड़े दान अन्य ऐसे स्थान पर फेंक दिया जाता है।

आज लडकियों का भ्रूण हत्या किया जा रहा है। तथा बताया कि अभी तक फैजाबाद के कई ब्लाक में महिलाओं को निःशुल्क प्रशिक्षित करने का कार्य किया है जिसमें महिलाओं को आचार बनाने पापड़ बनाने और सिलाई का कार्य है और अभी तक हमने दिव्यांग बच्चों के लिए कार्य किया है और आगे भी करते रहेंगे जिसके लिए अभी तक नौ राज्य पुरस्कार , दो अन्तराष्ट्रीय पुरस्कार के साथ मंडल स्तर और जिले स्तर में कुल अभी 39 पुरस्कार भी दिए जा चुके हैं।


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