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Ambedkar nagar 13 साल में 21 बार ट्रांसफर से IPS प्रभाकर के पिता ने क्यों लिया BJP के खिलाफ जाने का फैसला

प्रभाकर के पिता ने बताया कि प्रभाकर का तीन दिन और सात दिन में ही ट्रांसफर हुआ है।

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अम्बेडकर नगर के रहने वाले हैं IPS प्रभाकर

अम्बेडकर नगर के रहने वाले हैं IPS प्रभाकर

आईपीएस प्रभाकर चौधरी बरेली के एसएसपी पद से हटाए जाने के बाद जितनी सुर्खियों में रहे ,उतनी सुर्खियों में उस समय नहीं आये थे जब पीएम मोदी ने उनके कार्यो की तारीफ की थी। उस पर जब योगी का डंडा चला तो हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है।

अम्बेडकर नगर के रहने वाले हैं IPS प्रभाकर

सोशल मीडिया पर उनके कार्यों की चर्चा होने लगी। जिंदगी के उस हिस्से को बताएगा जिसे कम ही लोग जानते हैं। आईपीएस प्रभाकर चौधरी के पिता ने अपने बेटे को लेकर बताया कि आखिर प्रभाकर का इतनी बार ट्रांसफर क्यों हुआ।

बीजेपी के खिलाफ जाने का पिता का फैसला

बरेली में कांवड़ियो पर लाठीचार्ज मामले के कुछ ही घंटों बाद IPS प्रभाकर चौधरी का ट्रांसफर कर दिया गया। इससे पहले भी प्रभाकर को अलग-अलग जगहों से 21 बार ट्रांसफर किया जा चुका है। ट्रांसफर मिलने पर IPS के पिता ने गुस्से में आकर कहा कि वो आज से बीजेपी के खिलाफ ही रहेंगे। आगे चुनाव में कुछ इलाकों में तो बीजेपी को कभी भी जीतने नहीं देंगे।

साधारण परिवार के रहने वाले है प्रभाके

अपने कार्यों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले आईपीएस अधिकारी प्रभाकर चौधरी की जिंदगी बेहद साधारण में बीती है।अम्बेडकरनगर जिले थाना हंसवर के ग्राम महमूद पुर निवासी प्रभाकर चौधरी के पिता का नाम पारसनाथ चौधरी है। प्रभाकर की प्राथमिक शिक्षा शिशु मंदिर विद्यालय बसखारी से हुई। इसके बाद इंटर तक की शिक्षा इंदई पुर इंटर कॉलेज से हुई।

साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं प्रभाकर

प्रभाकर ने उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से किया और 2010 में अपने पहले ही प्रयास में आईपीएस बन गए। प्रभाकर चौधरी के पिता पारसनाथ चौधरी सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और ये विगत चालीस सालों से संघ और बीजेपी से जुड़े हैं। प्रभाकर चौधरी के पास गांव में अस्सी के दशक में बना पुश्तैनी मकान है और पूरे परिवार की जिंदगी काफी सामान्य तरीके से बीत रही है।

22 वीं बार ट्रांसफर हुआ तो अखर गई बात

वैसे तो तेरह साल की नौकरी में प्रभाकर का इक्कीस बार ट्रांसफर हो गया, लेकिन इस बार जब बरेली से उनका ट्रांसफर हुआ तो यह बात उनके पिता के साथ-साथ क्षेत्र वालों को भी अखर गयी। उनके पिता ने कहा कि प्रभाकर एक ईमानदार अधिकारी है और इसी लिए उसका इतनी जल्दी ट्रांसफर होता है।

पुलिस लाठीचार्ज न करती तो कांवड़िए

प्रभाकर के पिता ने बताया कि प्रभाकर का तीन दिन और सात दिन में ही ट्रांसफर हुआ है। बरेली की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस अधिकारी को इनाम मिलना था उसी को हटा दिया। उन्होंने कहा कि जिस रास्ते से कावंड़िये जाना चाहते थे, उस रास्ते से जाने पर खतरा था। पुलिस लाठी चार्ज न करती तो बड़ी घटना घट जाती और कई कांवड़िये की मौत हो जाती।