
ज्येष्ठ के मंगलवार को करें हनुमान जी की पूजा
ज्येष्ठ मास की शुरुआत हो चुकी है. जेष्ठ मास पुराणों में बड़ा ही महत्वपूर्ण है। और हिंदू धर्म में इस मास को अत्यंत फलदाई बताया गया है।
इस वर्ष पड़ रहे 4 मंगलवार
इस वर्ष ज्येष्ठ मास का श्री गणेश विगत 6 मई से हो चुका है। इस वर्ष माह में चार मंगलवार भी पड़ रहे हैं। जिसे बड़ा मंगलवार कहा जाता है।
ज्येष्ठा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा सबसे पवित्र दिन
ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ हिन्दू धर्म का तृतीय महीना है। ज्येष्ठा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम ज्येष्ठ पड़ा। इस मास में कई व्रत एवं त्यौहार भी पड़तेे हैं जो शास्त्रों में अत्यंत फलदाई बताएं गए हैं।
इस माह में 2 तिथि पर न करें शुभ काम
रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि ज्येष्ठ मास में 18 मई को पड रहे कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और 02 जून को पड रहे शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी मास शून्य तिथियां होती हैं। इन तिथियों में शुभ काम नहीं करना चाहिए।
ज्येष्ठ के मंगलवार को करें हनुमान जी की पूजा
बताते हैं कि ज्येष्ठ मास हनुमान जी का प्रिय मास है। श्रीराम से हनुमान जी की पहली मुलाकात ज्येष्ठ के महीने में हुई थी। यही वजह है कि ज्येष्ठ के महीने में पड़ने वाले मंगलवार का बड़ा महत्व होता है।
अलग अलग तिथियों के लिए होता है फलदाई
शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को तिलों के दान से अश्वमेध यज्ञ का फल होता है। मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी का व्रत किया जाता है। और कृष्ण पक्ष अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है।
और शनि देव जी का जन्म ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को रात के समय हुआ था। और दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पवित्र त्यौहार मनाया जाता है।
ज्येष्ठ माह में रखना चाहिए व्रत मिलेगा लाभ
उन्होंने कहा कि शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। ज्येष्ठ मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके जो भगवान त्रिविक्रम की पूजा करता है। वह गोमेध यज्ञ का फल पाता है।
ब्राह्मणों के अनुसार इस प्रकार जो मनुष्य ज्येष्ठ माह में विधि विधान से भगवान की स्तुति पूजन अर्चन, दान व् नियम संयम का पालन करता है उसे सर्वोत्तम फल की प्राप्ति होती है।
Published on:
08 May 2023 07:59 am
बड़ी खबरें
View Allअयोध्या
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
