
राम नगरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा नाचते गाते निकले श्रद्धालु
अयोध्या : जगन्नाथपुरी के तर्ज पर राम नगरी अयोध्या के मंदिरों से गाजे बाजे व हाथी घोड़ो के साथ भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में दूर दराज से आये श्रद्धालु नाचे गाते शामिल हुए। यह यात्रा परंपराओं को जीवित रखना और उसे सर्वव्यापी स्वरूप देना ही संत धर्माचार्यो और भक्तों का कर्तव्य है। जिसके तहत आज जगन्नाथ भगवान की रथ यात्रा हिन्दू समाज में समरस्ता स्थापित कर हिन्दुओ को एक सूत्र मे बांधे हुए निकाली गई। अयोध्या के प्रमुख प्राचीन जगन्नाथ मंदिर, दशरथ महल, मणिराम दास छावनी, हनुमत भवन, लवकुश मंदिर, चारोधाम मंदिर, राम हर्षण कुंज सहित अन्य कई मंदिरों से प्रमुख मार्ग होते हुए राम घाट के रास्ते सरयू तट पहुंचा जहां भव्य आरती के बाद यह यात्रा अपने मंदिरों के लिए निकली।
इस यात्रा में शामिल हुए श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा भगवान हर युग मे भक्तों को दर्शन देने के लिये प्रकट होते है अवश्यक्ता है भक्त उन्हें अपने अतः कारण से पुकारे । जगन्नाथ भगवान की यात्रा का उद्देश्य इसी से परिभाषित होता है कि लाखो लोग समरस भाव से रथ को खीचने मे एकाग्रता और एकात्मता का परिचय देते है वही जिस श्रद्धा और भक्ति से पुरी के मन्दिर में सभी लोग बैठकर एक साथ श्री जगन्नाथ जी का महाप्रसाद प्राप्त करते हैं उससे वसुधैव कुटुंबकम का महत्व स्वत: परिलक्षित होता है।इससे संदेश जाता है कि हमारे पर्व त्योहार और मेले सभी सामाजिक जीवन मूल्यो को अक्षुणता प्रदान करने वाले है। उन्होने कहा आज समाज को पथभ्रष्ट करने की साजिश की जा रही है पूर्व मे भी इसी प्रकार के षडयंत्र चले लेकिन वह हमारी संस्कृति और परम्पराओ को समाप्त नही कर पाये।पूर्व और आज वर्तमान मे भी हम अपने लोक एंव जनकल्याणकारी पथ के अनुगामी बने हुए निरंतर बढ रहे है। उन्होने कहा संस्कृति और परम्पराओ की रक्षा का दायित्व हम सभी का है।और यह तभी संभव होगा जब समाज ऐसे धार्मिक अनुष्ठानो मे सहभागी बनेगा ।
Updated on:
04 Jul 2019 07:42 pm
Published on:
04 Jul 2019 07:32 pm
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