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जगत गुरु परमहंस बोले – जेएनयू का नाम बदलकर ‘आजाद भगत सिंह विश्वविद्यालय’ करना चाहिए

JNU Protest : जगतगुरु परमहंस, आचार्य तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर ने जेएनयू की घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद जेएनयू में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और देश के खिलाफ नारेबाजी करना सीधा राष्ट्रद्रोह है।

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जेएनयू की घटना पर जगतगुरु परमहंस ने दिया बयान, PC- IANS

अयोध्या : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में सोमवार की रात प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ हुई कथित नारेबाजी को लेकर संत समाज में भारी आक्रोश देखने को मिला है। अयोध्या में संतों और धर्माचार्यों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे देश और संविधान का अपमान बताया है।

जगतगुरु परमहंस, आचार्य तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर ने इस घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने आईएएनएस से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद जेएनयू में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और देश के खिलाफ नारेबाजी करना सीधा राष्ट्रद्रोह है।

उन्होंने मांग की कि जेएनयू का नाम बदला जाए और इसे 'आजाद भगत सिंह विश्वविद्यालय' किया जाए। उनके अनुसार, जेएनयू से जो गतिविधियां सामने आ रही हैं, वे पूरी तरह राष्ट्रविरोधी हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में जिम्मेदार पदों पर बैठे सभी लोगों को बर्खास्त किया जाना चाहिए और ऐसे मामलों में दोषियों को जेल भेजने की आवश्यकता है।

गृहमंत्री से की आरोपियों के खिलाफ NSA लगाने की मांग

जगतगुरु परमहंस ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मांग की कि इस पूरे मामले में शामिल लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएएसए) लगाया जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जेएनयू परिसर में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के लिए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग बेहद निंदनीय है। उनके अनुसार, इस तरह की नारेबाजी बिल्कुल गलत है और ऐसे लोगों को कठोर सजा मिलनी चाहिए। वहीं, सीताराम दास महाराज ने और भी सख्त रुख अपनाया।

'ऐसे लोग भारत पर बोझ'

उन्होंने कहा कि जेएनयू के कुछ छात्र जिस तरह से आतंकवादी गतिविधियों और आतंकवादियों के समर्थन में नारे लगाते हैं, उन्हें चिन्हित कर देश से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग भारत पर बोझ हैं और इन्हें पाकिस्तान भेज देना चाहिए। ये लोग भारत के नाम पर कलंक हैं और ऐसे कलंक को देश से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।

सीताराम दास महाराज ने यह भी कहा कि जेएनयू का नाम बदला जाना चाहिए और भारत में किसी भी तरह की जिहादी सोच को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।