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राम मंदिर की भूमि पूजा तय मुहूर्त पर मतलब बैसाख शुक्ल सप्तमी को

लॉकडाउन में आनलाइन बनेगा बड़ा सहाराअगर परिस्थितियां रहीं प्रतिकूल तो वीडियो कांफ्रेंसिंग से शामिल होंगे पीएम मोदीखंडित प्रतिमा सरयू में विसर्जित कर नई हनुमान प्रतिमा की गई स्थापित

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राम मंदिर की भूमि पूजा तय मुहूर्त पर मतलब बैसाख शुक्ल सप्तमी को

राम मंदिर की भूमि पूजा तय मुहूर्त पर मतलब बैसाख शुक्ल सप्तमी को

लखनऊ. प्रदेश में लॉकडाउन कल खत्म हो जाएगा। पर संभवत: नया लॉकडाउन 30 अप्रैल तक जनता की सुरक्षा के लिए एक बार फिर लगाया जाए। लॉकडाउन से अयोध्या में राम मंदिर की भूमि पूजन बिल्कुल प्रभावित नहीं होगी। बैसाख शुक्ल सप्तमी को तय मुहूर्त पर ही राम मंदिर की भूमि पूजन होगी। 30 अप्रैल होने वाली भूमि पूजा में अगर कोई दिक्कत होती है तो आनलाइन के सहारे संकेतिक रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को शामिल किया जाएगा। और जब परिस्थितियां अनुकूल होगीं तब समारोह कर लिया जाएगा, ऐसी योजना पर विचार चल रहा है। इसी बीच हनुमानजी की खंडित प्रतिमा सरयू में विसर्जित कर उसकी जगह नई हनुमान प्रतिमा को स्थापित किया गया है।

श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन के 30 अप्रैल तदनुसार बैसाख शुक्ल सप्तमी को तय मुहूर्त पर ही भूमि पूजन होना निश्चित है। इसका संकेत रविवार को रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया।

कारसेवकपुरम में मीडिया से अनौपचारिक वार्ता में श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने लाकडाउन की तिथि आगे बढ़ेगी तो क्या भूमि पूजन की तिथि भी आगे बढ़ाई जाएगी के सवाल पर उत्तर दिया कि आजकल आनलाइन का जमाना है। तो फिर परेशानी ही क्या है? सोशल डिस्टेंसिंग भी रहेगी और कार्य भी बाधित नहीं होगा। 14 अप्रैल को खरमास के बाद निर्धारित मुहूर्त पर शादियां होंगी ही।

महासचिव चंपत राय ने बताया कि निर्धारित संख्या में लोग जाएंगे और कार्यक्रम निपटा देंगे। फिर जब परिस्थितियां अनुकूल होगीं तब समारोह भी कर लेंगे। उसी तरह से यह कार्य भी हो जाएगा। फिलहाल अभी हम इस बारे में नही सोच रहे हैं बल्कि यह चाहते है कि कोई ऐसी स्थिति न पैदा हो जिससे शासन-प्रशासन को दिक्कत आए।

30 अप्रैल की तिथि को सर्वथा अनुकूल :- पीएमओ की हरीझंडी मिलने के बाद संभावित तिथियों पर ट्रस्ट की ओर से भूमि पूजन का मुहूर्त निकलवाया गया था। वैदिक आचार्यो की ओर से 30 अप्रैल की तिथि को सर्वथा अनुकूल बताने के बाद पीएमओ से सहमति लेकर समय तय कर दिया गया था। ट्रस्ट ने इस तिथि की सार्वजनिक घोषणा नहीं की थी। फिर भी अंदरखाने तैयारियां जारी थी। इस तिथि पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी पहले ही मुहर लगा दी थी। फिलहाल अब पीएम नरेन्द्र मोदी व संघ प्रमुख भागवत दोनों का आगमन संभव नहीं दिख रहा है। ऐसे में वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही इन दोनों की उपस्थिति मनी जाएगी।

हनुमानजी की नई प्रतिमा स्थापित की :- रामजन्मभूमि के गर्भगृह में वर्ष 1992 से पाषाण खंड में उत्कीर्ण हनुमानजी की छोटी प्रतिमा मौजूद थी। इस प्रतिमा को सरयू नदी में विसर्जित करा दिया गया। रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येन्द्र दास ने बताया कि शास्त्रीय दृष्टि से खडित प्रतिमा पूजन नहीं की जाती है। अधिगृहीत परिसर के रिसीवर को यह बताया गया था। इसके बाद यह जानकारी रामजन्मभूमि ट्रस्ट को दी गयी थी। ट्रस्ट ने खंडित प्रतिमा के स्थान पर नई प्रतिमा मंगवाकर उसकी प्रतिष्ठा करा दी थी।

हटवाया गया टेंट :- रामजन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि गर्भगृह से विराजमान रामलला को नये भवन में प्रतिष्ठित करने के बाद स्थान रिक्त हो गया था। आगजनी के खतरे की वजह से अस्थाई टेंट को हटाने का निर्णय हुआ।


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