
अयोध्या के बृद्धा आश्रम में रहने वाली माँ की दास्तान
अयोध्या : मदर्स डे के मौके पर पूरा देश आज मातृशक्ति को सलाम कर रहा है। जहां आज मदर्स डे के दिन अपने सोशल मीडिया पर तस्वीर सुबह से ही लोग फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए मातृ दिवस को एक पर्व के रूप में मना रहे हैं . लेकिन आज की मौजूदा स्थिति में इंसान दुनिया में लाने वाली मां को अपने ऐशो आराम की जिंदगी को लिए मां के इस सम्मान को भी खो रहा है ऐसी ही एक ऐसी स्थिति अयोध्या के वृद्ध आश्रम में रहने वाले कुछ माँ की है जो आज अपने परिवार की याद में सिर्फ आंसू ही बहा रही हैं लेकिन अब अपनी उस परिवार में जाना स्वीकार नहीं है।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या में स्थित वृद्धा आश्रम में तमाम ऐसी महिलाएं हैं जिनको उनके बेटे और बहू ने ठुकरा दिया और आज वह एक गुमनाम जिंदगी जी रही है . जिंदगी के आखिरी दिनों में अपना कहने के नाम पर उनके पास कोई नहीं है।लेकिन भगवान के नाम का सहारा उनकी जिंदगी की नैया को पार लगा रहा है। और अपनों से ठुकराई वृद्ध महिलाओं के लिए सिर्फ भगवान की पूजा और अपना पेट भरना ही जिंदगी है। जो सुबह से उठकर भगवान श्री राम का नाम लेते हुए दिन भर भजन कीर्तन और पूजा पाठ में अपना दिन बिताने वाली इन महिलाओं की जिंदगी भी दुनिया से बिल्कुल अलग है . ना होली न दिवाली न कोई और पर्व न त्यौहार . इनके लिए सिर्फ और सिर्फ भगवान की पूजा उपासना और अपना पेट भरना ही जिंदगी है . मातृ दिवस के मौके पर आज हम आपको अयोध्या में रहने वाली वृद्ध महिलाओं की जिंदगी से रूबरू कराएंगे जिन को उनके अपनों ने ही ठुकरा दिया है .
मातृ दिवस के मौके पर पत्रिका टीम जब अयोध्या के राम घाट क्षेत्र एक वृद्ध आश्रम पहुंची तो वहां रोजाना की तरह कुछ वृद्ध महिलाएं भगवान की कीर्तन में व्यस्त थी तो कुछ महिलाएं अस्वस्थ होने के कारण आराम कर रही थी तो बृद्धा आश्रम में साथ रहने वाले महिलाओं के लिए भोजन बनाने में जुटी थी ।हमारी टीम ने जब इन महिलाओं से इनकी जिंदगी के बारे में बात करने की कोशिश की तो इन्होंने कुछ भी बात करने से इंकार कर दिया . लेकिन जब हमारी टीम ने बताया कि आज मातृ दिवस है और लोग अपनी मां को सम्मान और प्रणाम कर रहे हैं तो इन में तमाम महिलाओं की आंखों से आंसू छलक आए . भले ही बदलते परिवेश में आधुनिकता की चकाचौंध में आज हमारा समाज संस्कारहीन हो रहा है लेकिन कम से कम उसके लिए तो हमेशा दिल में सम्मान होना चाहिए जिसने इस दुनिया में हमे एक मुकाम दिया है
उत्तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली मां झुमरीदासी ने बताया कि जब परिवार के लोग ही भूखे रखने लगे और रोटी से दूरी बन गई तो मजबूरन वृद्धा आश्रम का सहारा लेना पड़ा वही बताया कि जब अपने ही अपने नहीं रहे तो अब तो हम आपके आदि हैं जब हमारी अपने बेटे और बहू ने ही पानी और रोटी के बिना घर से बाहर निकाल दिया तो अब किसी और चीज की उम्मीद नहीं है बस अब इसी आश्रम में ही रहेंगे ।।
उत्तर प्रदेश के केशवपुर की रहने वाली सियावती ने अब तो ठान लिया है कि इस राम की नगरी में ही रहे और यही पर अंतिम सांस लेंगें। हमारी पति के मरने के बाद हमारी सिर्फ एक ही पुत्री थी जो आज अपने परिवार को लेकर हमें ही घर से निकाल दिया और सब कुछ अपने पति के नाम कर दिया इसलिए अब हम उस घर कभी नहीं जाना चाहते जहां हमारा कोई अस्तित्व ही नहीं है
कहीं हमारी टीम ने वृद्ध आश्रम में मौजूद अन्य महिलाओं से भी बात करने की कोशिश की लेकिन अपनी पुरानी जिंदगी में अपने बेटों और परिवार से मिले तमाम दुख को दोबारा अपनी जुबान पर लाकर अपना दर्द बढ़ाने से बेहतर इन महिलाओं ने चुप रहना ठीक समझा . भले ही बदलते परिवेश में आधुनिकता की चकाचौंध में आज हमारा समाज संस्कारहीन हो रहा है लेकिन कम से कम उसके लिए तो हमेशा दिल में सम्मान होना चाहिए जिसने इस दुनिया में हमे एक मुकाम दिया है
Published on:
12 May 2019 03:01 pm
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