
कैबिनेट मंत्री रहे दाउदयाल खन्ना ने श्रीराम जन्म भूमि मुक्ति का आंदोलन शुरू किया। दाउदयाल खन्ना ने 23 मई 1983 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखा ।
Ram Mandir Katha: यह ठीक है कि कांग्रेस सरकार ने हाईकोर्ट में लिख कर दे दिया कि उसका इस मामले में कोई रुचि नहीं है। दूसरी तरफ सोमनाथ के पुनर्निमाण पर नेहरू भी अपनी नापसंदगी प्रगट कर चुके थे। लेकिन इतिहास के सच का दूसरा पहलू भी है।
जब संसद में कांग्रेस सांसद पंडित रामनगीना मिश्र ने श्रीराम जन्मभूमि का मुद्दा उठाया। वह पहले सांसद कहे जा सकते हैं जिन्होंने राममंदिर का मुद्दा संसद में उठाया और जोरदारी से अपनी बात रखी। हांलाकि उनको राजीव गांधी सरकार ने पार्टी से निकाल बाहर किया। जिसके बाद वह भाजपा में आकर खुलकर राममंदिर आंदोलन में शामिल हो गए। तीन बार भाजपा से सांसद वह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से रहे।
पूर्व पत्रकार और राम मनोहर लोहिया अवध विश्व विद्यालय के सिंधी भाषा विभाग के सरल ज्ञापटे जी आंदोलन के दौर में पत्रकार रहे हैं। वह एक फोटो दिखाकर दावा करते हैं कि श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति के लिए कुछ लोग धरना दे रहे हैं। जिसमें एक मुस्लिम सज्जन जो कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी है वह भी बैठे हुए हैं।
उत्तर प्रदेश की कांग्रेस सरकार
उत्तर प्रदेश में 1962 से 1967 तक कांग्रेस की सरकार थी, जिसके मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्त जी थे। इतिहास में दर्ज है कि उनके मंत्रीमंडल में कैबिनेट मंत्री रहे दाउदयाल खन्ना ने श्रीराम जन्म भूमि मुक्ति का आंदोलन शुरू किया। दाउदयाल खन्ना ने 23 मई 1983 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखा और कहा कि श्रीराम जन्मभूमि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ को हिंदुओं को सौंप दिया जाना चाहिए।
इसी साल उत्तराखंड के नैनीताल में उन्होंने विशाल जनसभा किया और यही सवाल दुहराया जिसके बाद उनका संपर्क राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हो गया। अगले साल छह मार्च को उत्तरप्रदेश के मुज्जफरनगर में विराट हिंदू आम सभा हुई। जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा और आएसएस के पूर्व सरसंघचालक प्रोफेसर राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भईया शामिल हुए। रज्जू भईया ने तत्कालीन सरसंघचालक बाला साहब देवरस से दाउ दयाल खन्ना की बात कराई। संघ ने खन्ना को समर्थन देने का निश्चय किया। जिसके बाद विश्व हिंदू परिषद भी श्रीराम मंदिर आंदोलन में कूद पड़ा।
देवोत्थान एकादशी 16 नवंबर 1983
विश्व हिंदू परिषद ने तय किया कि देवोत्थान एकादशी 16 नवंबर 1983 से लेकर गीता जयंती 16 दिसंबर 1983 तक कुल एक महीने तक देश भर में एकात्मता यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इसमें दो मुख्य रथयात्राएं, पांच सहायक रथयात्राएं और 87 उपयात्राएं निकाली गई।
इन सभी यात्राओं ने कुल 50 हजार किलोमीटर की दूरी देश में तय किया और गांव-गांव, कस्बे-कस्बे में श्रीराम मंदिर आंदोलन को राष्ट्र की अस्मिता से जोडऩे में कामयाब रही। नेपाल में पशुपति रथ जो पशुपति नाथ महादेव मंदिर से रवाना हुआ जो कि केरल के रामेश्वरम तक गया।
म्यांमार का शिष्ट मंडल इरावती नदी का जल लेकर कोलकाता में कपिल रथ पर सवार हुआ। मारीशस के पूर्व मंत्री दयानंद बसंतराय वहां की रामस नदी का जल लेकर आए तो पाकिस्तान से कटाक्षराज महादेव का जल लेकर गोस्वामी गिरधारी लाल आए। मानसरोवर और बांग्लादेश की नदियों का जल लेकर भी हिंदू आए तो बिहार, आसाम, बंगाल, उडि़सा में भी एकात्मता यात्रा को गजब का समर्थन हासिल हुआ।
उड़ीसा के राज्य मंत्री हबीबुल्ला खां ने किया रथ का पूजन
आदिवासी, वनवासी क्षेत्रों में एकात्मता यात्रा का भारी स्वागत हो ही रहा था। जहां विश्व हिंदू परिषद का काम शुरू नहीं हुआ था, उन राज्यों में भी एकात्मता यज्ञ रथयात्रा का लोगों ने खूब स्वागत किया। उड़ीसा के राज्यमंत्री हबीबुल्ला खां ने कोरापुट जिले में गंगारथ की पूजा किया तो मणिपुर के मुख्यमंत्री पाढंरकोण में मुख्यअतिथि बने।
असम के कछार जिले में सरकार ने एकात्मता यात्रा पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल को तैनात कर दिया लेकिन जवानों ने सरकार के आदेश की अनदेखी कर दी। इसके बाद गृह सचिव ने यात्रा को जारी रखने का आदेश दिया। यहां तक कि एकात्मता यात्रा जब उत्तर प्रदेश के बहराईच जिले में आई तो उन दिनों किसी कारण से वहां पर कफ्र्यू लगा था। लेकिन यात्रा के आगमन को देखते हुए कर्फ्यू हटा लिया गया और लोग पूरे उत्साह से शामिल हुए।
हर नदी, तालाब और कुंआ का पानी पहुंचा सोमनाथ
एकात्मता यात्रा में लोग अपने क्षेत्र, गांव के तालाब, नदी, सरोवर, कुंआ का जल लेकर आते और वह जल रथ पर रखे घड़ों में डालते थे। फिर घड़ों में से जल लेकर जाते और अपने-अपने क्षेत्र के मंदिरों में उसी जल से जलाभिषेक करते। एक तरह से देशभर के सभी स्थानों का जल इन घड़ों में इकट्ठा हो चुका था, जब एकात्मता यात्रा सोमनाथ और रामेश्वरम पहुंचा। इस यात्रा के दौरान 1700 जन सभाओं का आयोजन हुआ और विश्व हिंदू परिषद ने दावा किया कि चार लाख कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए।
Published on:
19 Oct 2023 07:38 am
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