
उत्तर प्रदेश के आईएएस अधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह (photo- @DrDinesh_IAS)
Dinesh Chandra Singh IAS: राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया इस समय अहम दौर में है। मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने के लिए शुरू की गई इस चयन प्रक्रिया में कई अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों ने आवेदन किया है। इन्हीं में एक नाम डॉ. दिनेश चंद्र सिंह का भी है। उत्तर प्रदेश कैडर के 2012 बैच के IAS अधिकारी दिनेश चंद्र कई जिलों में जिलाधिकारी के साथ-साथ अलग-अलग महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
राम मंदिर CEO पद के लिए उनका इंटरव्यू भी हुआ है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि आखिर डॉ. दिनेश चंद्र सिंह कौन हैं और प्रशासनिक सेवा में उनका अब तक का सफर कैसा रहा है।
डॉ. दिनेश चंद्र सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने वर्ष 1997 में उत्तर प्रदेश की प्रांतीय सिविल सेवा यानी PCS से अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत की। करीब 15 साल बाद वर्ष 2012 में उन्हें प्रमोशन के जरिए IAS कैडर मिला। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों और विभागों में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। प्रशासनिक अनुभव के लिहाज से उनकी लंबी पारी को राम मंदिर CEO पद की दौड़ में उनकी प्रमुख खूबियों में गिना जा रहा है।
दिनेश चंद्र सिंह ने 2018 में अलीगढ़ के मुख्य विकास अधिकारी के रूप में काम किया। इसके बाद वह गाजियाबाद के नगर आयुक्त रहे। वर्ष 2020 में उन्हें कानपुर देहात का जिलाधिकारी बनाया गया। इसके बाद उन्होंने संस्कृति विभाग में विशेष सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली और जून 2021 में बहराइच के डीएम बनाए गए। मई 2023 में उन्हें सहारनपुर की कमान मिली। बाद में वह चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग में विशेष सचिव रहे। सितंबर 2024 में उन्हें जौनपुर का जिलाधिकारी बनाया गया, जहां उन्होंने मई 2026 तक जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्हें लखनऊ में लोक निर्माण विभाग (PWD) में विशेष सचिव की जिम्मेदारी मिली।
डॉ. दिनेश चंद्र सिंह की कार्यशैली ने उन्हें जौनपुर में खास तौर पर चर्चा में रखा। वह फील्ड विजिट और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद के लिए जाने गए। 2025 में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। जौनपुर के बक्शा क्षेत्र की एक गोशाला के निरीक्षण के दौरान वह खुद हंसिया लेकर नेपियर घास काटते दिखाई दिए। उन्होंने पशुओं के चारे और किसानों को नेपियर घास की खेती के फायदे भी बताए थे। जौनपुर में उन्होंने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए ढैंचा की खेती जैसी पहल पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित करना था।
प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान उनका नाम एक विवाद से भी जुड़ा। एक सड़क निर्माण में करीब 26.58 लाख रुपये की कथित अनियमितता का मामला सामने आया था। इस प्रकरण पर उनके एक बयान को लेकर विवाद हुआ, जिसमें उन्होंने अपेक्षाकृत कम राशि के मामले को लेकर जिले की छवि प्रभावित न होने देने की बात कही थी। इस बयान की आलोचना भी हुई थी।
जौनपुर के डीएम रहते हुए डॉ. दिनेश चंद्र सिंह का नाम एक अवमानना संबंधी मामले में भी सामने आया था। मामला कुछ लोगों को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़ा था। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर याचिकाकर्ताओं ने अवमानना याचिका दाखिल की थी। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी को नोटिस का सामना करना पड़ा था।
डॉ. दिनेश चंद्र सिंह के बारे में एक और खास बात यह है कि उन्होंने ‘कर्म निर्णय’ नाम की किताब लिखी है। इसमें उनके प्रशासनिक अनुभवों और अलग-अलग परिस्थितियों में लिए गए फैसलों से जुड़े अनुभवों का उल्लेख किया गया है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि में एमएससी और एलएलबी की डिग्रियां शामिल हैं। करीब तीन दशक से प्रशासनिक सेवा से जुड़े डॉ. दिनेश चंद्र अब राम मंदिर CEO पद की चयन प्रक्रिया में शामिल हैं।
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, रोजाना की व्यवस्थाएं, प्रशासनिक कामकाज, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा, निर्माण और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय जैसे कई बड़े काम हैं। ऐसे में CEO का पद केवल प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं को एक व्यवस्थित ढांचे में चलाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब चयन समिति उम्मीदवारों के अनुभव और प्रशासनिक क्षमता का आकलन कर रही है। इनमें डॉ. दिनेश चंद्र सिंह का लंबा प्रशासनिक अनुभव उन्हें इस पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल करता है। अंतिम फैसला चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रस्ट की ओर से लिया जाएगा।
Updated on:
13 Aug 2026 01:17 pm
Published on:
13 Aug 2026 01:17 pm
