
राम मंदिर (फाइल फोटो- पत्रिका)
Ram Mandir Donation Dispute Row Ayodhya: अयोध्या राम मंदिर में नकद दान और बहुमूल्य चढ़ावे के प्रबंधन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में दान संग्रह और उसकी प्रक्रिया में कई गंभीर प्रक्रियागत कमियों की पहचान की है। रिपोर्ट के मुताबिक, दान संग्रह की शुरुआती प्रक्रिया से ही ऐसी खामियां मौजूद थीं, जिनसे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हुई।
SIT के मुताबिक, श्रद्धालु मंदिर में 3 माध्यमों से दान करते हैं। इसमें पहला, मंदिर परिसर में लगे हुंडियों (दान पात्र) में नकद राशि और बहुमूल्य वस्तुएं डालकर। दूसरा, निर्धारित दान काउंटरों के माध्यम से। तीसरा, ट्रस्ट कार्यालय के जरिए।
रिपोर्ट के अनुसार, निर्धारित व्यवस्था के तहत हुंडियों से निकाली गई नकद राशि को एक तय प्रक्रिया से गुजरना था। इसमें ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के प्रतिनिधियों द्वारा संयुक्त रूप से हुंडियां खोली जानी थीं। इसके बाद नकदी और अन्य वस्तुओं को बक्सों में रखकर सील या लॉक किया जाना था।
इसके बाद इन बक्सों को तीर्थयात्री सुविधा केंद्र (Pilgrim Facilitation Centre) स्थित काउंटिंग रूम तक पहुंचाया जाना था, जहां नकदी की छंटाई, बंडलिंग और गिनती के बाद उसे ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा किया जाना था।
SIT के मुताबिक, गिनती के दौरान मिलने वाली बहुमूल्य वस्तुओं को हुंडी नंबर-12 में जमा किया जाना था। इस हुंडी को भी समय-समय पर संयुक्त रूप से खोलकर उसमें मौजूद वस्तुओं का वजन, वर्गीकरण और प्रकार सहित पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाना था।
SIT ने जांच के दौरान पाया कि व्यवहार में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक हुंडी की अलग-अलग गिनती और रिकॉर्ड तैयार करने के बजाय कई हुंडियों की सामग्री को गिनती से पहले ही आपस में मिला दिया जाता था। इससे यह पता लगाना संभव नहीं रह जाता था कि किस हुंडी से कितनी राशि या सामग्री प्राप्त हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दान ले जाने वाले नकदी बक्सों की नंबरिंग और ट्रैकिंग की कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी।
जांच में ये बात भी सामने आई कि यह स्थापित करने का कोई तंत्र मौजूद नहीं था कि कौन-सा बॉक्स किस हुंडी से आया, किसी दिन कितने बॉक्स पहुंचे, कितने बॉक्सों की गिनती हुई और क्या कोई बॉक्स बिना गिने रह गया। SIT ने इसे ऑडिट और जवाबदेही के लिहाज से बड़ी कमजोरी बताया है, खासकर तब जब मंदिर में बड़ी मात्रा में सार्वजनिक दान प्राप्त होता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, व्यवस्थागत कमियां केवल नकद दान तक सीमित नहीं थीं बल्कि सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के प्रबंधन में भी खामियां पाई गईं। SIT के मुताबिक श्रद्धालु बहुमूल्य वस्तुएं 3 माध्यमों से अर्पित करते हैं—हुंडियों के जरिए, निर्धारित दान काउंटरों पर और गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) के निकट। इन सभी माध्यमों में रसीद जारी करना, दस्तावेज तैयार करना, वजन करना, फोटोग्राफी, सुरक्षित रखरखाव और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ट्रांसफर किया जाना अपेक्षित था।
हालांकि जांच में सामने आया कि हुंडियों से प्राप्त बहुमूल्य वस्तुओं के लिए रजिस्टर तो रखा जाता था, लेकिन शुरुआती स्तर पर वस्तुओं का तत्काल वजन, फोटोग्राफी और सीलिंग सभी मामलों में समान रूप से नहीं की जाती थी। इसी तरह निर्धारित काउंटर्स पर जमा की गई बहुमूल्य वस्तुओं के लिए रसीद प्रणाली मौजूद थी, लेकिन जांचकर्ताओं को ऐसे मामलों में भी खामियां मिलीं, जहां श्रद्धालुओं को अनौपचारिक माध्यम से लाया गया या निर्धारित प्रक्रिया से बाहर वस्तुएं प्राप्त हुईं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि गर्भगृह के पास प्राप्त चढ़ावे का रिकॉर्ड तो रखा जाता था, लेकिन उसकी कस्टडी और ट्रांसफर की प्रक्रिया का एक हिस्सा अनौपचारिक रहा और उसका पर्याप्त दस्तावेजीकरण (Documentation) नहीं किया गया।
SIT को बताया गया कि सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं गर्भगृह के पास स्थित एक लॉकर में सुरक्षित रखी जाती हैं और उनकी प्रविष्टियां अलग रजिस्टर में दर्ज होती हैं। जांच के दौरान SIT ने लॉकर रजिस्टर में दर्ज 11 बहुमूल्य वस्तुओं का रैंडम फिजिकल वेरिफिकेशन किया। रिपोर्ट के अनुसार, ये वस्तुएं ट्रस्ट की कंप्यूटरीकृत रसीद प्रणाली में दर्ज विवरण से मेल खाती पाई गईं।
SIT ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। MoU और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत SBI को नकदी गिनती की निगरानी, करेंसी काउंटिंग मशीनों की उपलब्धता और सही संचालन सुनिश्चित करने, गिनती में लगे कर्मियों की निगरानी, सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कराने और पूरी प्रक्रिया में SOP का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन जांच में पाया गया कि इन जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं किया गया।
SIT के अनुसार, SOP में निर्धारित कई सुरक्षा उपाय या तो लागू नहीं किए गए या उनका पर्याप्त पालन नहीं कराया गया, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही कमजोर हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन ना होने से दान प्रबंधन प्रणाली में बनाए गए जांच एवं संतुलन (Checks and Balances) का ढांचा कमजोर पड़ा। जांचकर्ताओं का निष्कर्ष है कि सहमति से तय प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित ना कर पाने के कारण बैंक की भूमिका भी जांच में सामने आई व्यवस्थागत कमियों का एक महत्वपूर्ण कारण रही।
सूत्रों के अनुसार, अब जांच का दायरा और बढ़ सकता है। अयोध्या पुलिस दान प्रबंधन प्रक्रिया से जुड़े SBI अधिकारियों और बैंक द्वारा नियुक्त आउटसोर्स कर्मियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। पूछताछ में विशेष रूप से नकदी गिनती की प्रक्रिया और आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े पहलुओं पर भी फोकस किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
Updated on:
09 Jul 2026 11:27 am
Published on:
09 Jul 2026 11:27 am
